mothers day special : सिर से पिता का साया उठा तो मां ने अपने दुख भूलकर बेटे को बना दिया आईएएस अफसर
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छतरपुर. 10 साल की उम्र में पिता हमें छोड़कर इस दुनिया से चले गए। दो बहनें और मैं अकेला मां के पास रह गया। मेरे एक बड़े भाई की एक्सीडेंट में हुई मौत के सदमे से मां उबर भी नहीं पाई थी कि पिताजी अचानक से चल बसे। इस बज्रपात के बाद भी मां ने हम सबको संभाला। उन्होने मां के साथ-साथ पिता का फर्ज भी निभाया और मेरी परवरिश करके पढ़ा-लिखाकर मुझे २१ साल की उम्र में आईपीएस बना दिया। इसके बाद मैंने मां की इच्छा को पूरा करने आईएएस बनाया। मेरे लिए मेरी मां भगवान है। भगवान हर कहीं नहीं पहुंच पाता, शायद इसलिए उसने मां को बनाया है। मेरी मां मेरे लिए भगवान है। मैं हर दिन की शुरुआत अपनी मां का ममताभरा चेहरा देखकर करता हूं। यह कहना है छतरपुर के कलेक्टर मोहित बुंदस का। 21 साल की उम्र में आइपीएस बनने वाले बुंदस जयपुर के निवासी है। वे मां के कारण ही खुद के इस मुकाम पर होना मानते हैं। बुंदस वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के पहले 18 दिसंबर 2006 से 24 अगस्त 2011 तक झारखंड कैडर में आइपीएस थे। इसके बाद इन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा में मध्य प्रदेश कैडर आवंटित हुआ। कोटा से वापस लाकर मां ने कराई तैयारी कलेक्टर मोहित बुंदस बताते हैं कि बचपन में मैं पिताजी के साथ खूब खेला करते थे। पिताजी बच्चा बनकर हमारे साथ खेलते थे। लेकिन वे अचानक से हम सबको छोड़कर इस दुनिया से चले गए तो मैं मायूस रहने लगा। मैं उन्हें बहुत मिस करता था। ऐसे समय में मां ने मुझे संभाला। मां मेरा बहुत ख्याल रखती थीं। मुझे कभी अकेला नहीं छोड़ती थी। कक्षा 10वीं में टॉप करने के बाद आइआइटी की तैयारी के लिए मां ने मुझे कोटा भेजा, लेकिन वह मुझे अकेले नहीं छोड़ पा रहीं थी। इसका एक कारण यह भी था कि मेरे जन्म से पहले मेरे एक बड़े भाई की एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। इस कारण वह मुझे लेकर बहुत अधिक केयरफुल रहती थीं, आज भी हैं। अपने से ज्यादा मेरी चिंता करतीं और अपने से ज्यादा मुझे खुश रखा। कोटा में पढ़ाई के दौरान बीच में स्थिति यह हुई कि उन्होंने स्ट्रीम चेंज कराकर मुझे वापस घर ले आईं और जयपुर से ही तैयारी करवाई। मां के आशीर्वाद से मैं 21 साल की उम्र में आईपीएस बन गया। मां के साथ-साथ दोनों बहनों ने भी मुझे बहुत सपोर्ट किया। इसके बाद मुझे आइएएस अवार्ड हुआ। मैं मां के बिना नहीं रह पाता, इसलिए वह हर पल साथ होती है कलेक्टर बुंदस बताते हैं कि वे मां के बिना नहीं रह पाते हैं। आज भी मां उनके साथ रहती हैं। मां को देखकर ही वे अपने दिन की शुरुआत करते हैं। भगवान के पहले मां को ही देखते हैं। बुंदस के अनुसार मां उनका बहुत अधिक ख्याल रखती है। नाश्ता से लेकर खाना तक की चिंता वे आज भी करती हैं। आज भी कई बार मां अपने हाथ से बनाकर खाना खिलाती है। बुंदस कहते हैं कि मैं बहुत खुशनसीब हूं जो मुझे इतनी प्यारी मां मिली। मां अब मेरी जिम्मेदारी है, इसलिए उसे हर सुख देने के लिए मैं कोशिश करता हूं।