Magnificent MP : सहज, सुलभ संभावनाओं के जरिए मध्य प्रदेश में खुलेंगे निवेश के रास्ते- सीएम कमलनाथ

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Update: 2021-02-16 06:10 GMT

भोपाल। कड़ी प्रतिस्पर्धा और चुनौतियों के बीच बेहतर भविष्य की संभावनाएं निर्मित करना बेहद कठिन कार्य है। फिर भी... हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के जरिए प्रदेश के विकास का खाका खींच लिया है। हमारी 10 माह की मेहनत, मैग्निफिसेंट एमपी के बाद देखने को मिलेगी। जब मध्य प्रदेश में उद्योगों की सहज, सुलभ संभावनाओं को देखते हुए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय कंपनियां निवेश के लिए आगे आएंगी। हमने निवेशकों के लिए नई औद्योगिक नीति के जरिए भरोसे की एक लाइन खींची है, जो प्रदेश में निवेश को आगे बढ़ाएगी। यह कहना है मुख्यमंत्री कमलनाथ का, जो इन दिनों 'मैग्निफिसेंट एमपी' को लेकर बेहद आशान्वित हैं। इस वृहद आयोजन को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया उनका प्रदेश के विकास को लेकर नजरिया कुछ इस प्रकार रहा...

सवाल- अभी तक प्रदेश में ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट होती आई हैं, मैग्निफिसेंट एमपी क्यों? - यह एक ऐसा मंच है, जिसमें उद्योगपतियों और सरकारी विभागों के अधिकारियों द्वारा आज की औद्योगिक परिस्थितियों, आवश्यकताओं और चुनौतियों के बारे में मंथन किया जाएगा। हमारी सरकार विश्वास का वातावरण बनाना चाहती है, जिससे उद्योग सुगमता से संचालित हो सकें। हम उन निवेशकों पर फोकस्ड हैं, जिन्होंने या तो राज्य में निवेश किया है या जो राज्य में निवेश करने के इच्छुक हैं। जिन्होंने राज्य में निवेश किया है वह हमारे ब्रांड एंबेसडर हैं।

सवाल- आप कहते हैं कि निवेश भरोसे से आता है। आखिर भरोसे का संकट क्यों पैदा हुआ? - जी हां बिल्कुल, व्यापारिक संबंधों का आधार भरोसा ही होता है। हम चाहते हैं कि निवेशकों और प्रदेश के बीच विश्वास के आधार पर भविष्य के संबंध बनें। पहले कहां कमी रह गई, कहां चूक गए, इसके बजाय भविष्य की ओर देख रहे हैं और हम प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ व्यापारिक वातावरण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उदाहरण के लिए, भूमि अधिग्रहण लंबी प्रक्रिया है। जिसे सरल बनाने के लिए 'लैंड पूलिंग पॉलिसी' पर कार्य किया है। उद्योगों के लिए ईज ऑफ डूईंग बिजनेस के सिद्धांत पर कार्य कर रहे हैं। विश्वस्तरीय औद्योगिक अधोसंरचना का विकास, स्किल्ड वर्क फोर्स, परिवहन सुविधाएं, इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर जैसी बुनियादी जरूरतों पर काम किया जा रहा है।

सवाल- प्रदेश में स्थानीय स्तर पर 70 फीसदी लोगों को रोजगार दिलाने की आपकी सोच कैसे पूरी होगी? - हम प्रदेश में लगने वाले उन्हीं उद्योगों को सब्सिडी व अन्य रियायतें देंगे जो स्थानीय युवाओं को 70 प्रतिशत रोजगार देंगे। हमने आरंभ से ही यह प्रावधान रखा है और इसी शर्त पर हम उद्योगों को प्रोत्साहित करेंगे जिससे युवाओं को रोजगार मिलना सुनिश्चित हो सकेगा। इस साल निवेशक सम्मेलन में कोई भी एमओयू साइन नहीं होगा। राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए रिलेशनशिप मैनेजर के माध्यम से हम इन्वेस्टर कम्युनिटी से निरंतर संवाद स्थापित करेंगे। हम उन प्रमुख मुद्दों को समझेंगे जो निवेश के रास्ते में बाधा उत्पन्न् कर रहे हैं, उन्हें कम से कम समय में हल करने का प्रयास हमारी सरकार करेगी।

सवाल- आपका मानना है कि सभी उद्योगों के लिए एक नीति नहीं हो सकती, तो कौन-कौन से बदलाव किए जा रहे हैं? - हम प्रदेश में उद्योगों के लिए एक सकारात्मक और अनुकूल वातावरण निर्मित करना चाहते हैं। इसके लिए हमने पिछले 10 महीनों में कई उद्योगपतियों के साथ विमर्श किया है। मध्यप्रदेश देश का एक मात्र राज्य है, जहां प्रोत्साहन राशि टैक्स से डीलिंक्ड है तथा निर्यात, रोजगार और पिछड़े क्षेत्रों में उद्योग के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन की व्यवस्था है। हमारी नई औद्योगिक प्रोत्साहन नीति जल्द ही जारी होगी जिसमें कई प्रभावी संशोधन दिखाई देंगे। जैसे कि देश में पहली बार उद्योगों के लिए जमीन मुहैया कराने के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी तैयार की गई है। औद्योगिक क्षेत्रों में सस्ती बिजली के लिए अलग से वितरण कंपनी बनाने का विचार चल रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 'डेडिकेटेड वाटर सप्लाई सेटअप' की व्यवस्था की जाएगी।

सवाल- आप कहते हैं कि प्रदेश में निवेश की अपार संभावनाएं हैं तो फिर निवेशक की नजर क्यों नहीं पड़ी? - पिछली सरकार की कुछ नीतियों ने मध्यप्रदेश को पीछे रखा। हम एक स्पष्ट दृष्टि से आगे बढ़ रहे हैं। निवेश को आकर्षित करने के लिए, उद्योगों के लिए एक ईको सिस्टम विकसित करना और उन्हें विश्व स्तर की सुविधाएं प्रदान करना सर्वोपरि है। हम सिंगल विंडो सिस्टम से निवेशकों को व्यापार करने की सुगमता भी प्रदान कर रहे हैं। अवसरों का दरवाजा खोल रहे हैं। निवेश प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं। भारत के अन्य हिस्सों के साथ बेहती कनेक्टिविटी, पारदर्शी और स्पष्ट औद्योगिक नीति एवं उद्योगों के प्रति अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं के साथ- साथ समय पर सेटलमेंट के लिए भी मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। मैं आशावादी हूं कि इसके परिणामस्वरूप राज्य में निवेश होगा और हमारे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

सवाल- प्रदेश में उद्योगों की मानव संसाधन से जुड़ी जरूरतें पूरी क्यों नहीं हो पा रही हैं? - हमारी सरकार जानती है कि स्किल्ड मैनपावर उद्योगों की प्राथमिकता है। इसलिए सरकार स्किल डेवलपमेंट और ट्रेनिंग पर विशेष जोर दे रही है। उद्योगों के फीडबैक के आधार पर पाठ्यक्रमों में बदलाव किया जा रहा है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि कुशल मैनपावर केवल श्रम क्षेत्र तक सीमित न रहे, हम उच्च शिक्षा में भी बेहतर गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम मध्य प्रदेश में प्रतिष्ठित संस्थानों को आकर्षित करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं।

सवाल- मंदी के बीच आप इतने आशान्वित क्यों हैं कि उद्योगपति मप्र में निवेश करेंगे? - मैं यह मानता हूं कि देश में नोटबंदी और जीएसटी के गलत क्रियान्वयन के कारण आर्थिक मंदी का प्रभाव है और उसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा है। हम उस स्थिति को मध्यप्रदेश में बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैं। मध्यप्रदेश की अपनी विशेषताएं हैं। मध्यप्रदेश अपने आप में ही अनूठा प्रदेश है, उद्योगों के लिए आवश्यक संसाधनों की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है। मध्यप्रदेश राज्य की सीमा देश के अन्य पांच राज्यों से जुड़ती है और यहां निवेश करने वाले निवेशकों को उन पांच राज्यों तक आसान बाजारी पहुंच का फायदा भी मिलता है। पिछले 10 महीनों में फोकस्ड सेक्टर के निवेशकों के साथ विचार-विमर्श किया है।

सवाल- कृषि को उद्योग से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए आपकी क्या योजना है? - पिछली सरकारों ने कृषि क्षेत्र के विकास पर अधिक ध्यान नहीं दिया जिसका परिणाम है कि हम कृषि को उद्योगों से बेहतर ढंग से जोड़ नहीं पाए। प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में लंबे समय से स्व-सहायता समूह द्वारा कृषि उत्पाद तैयार किए जाते रहे हैं पर बड़े बाजार तक उनकी पहुंच न होना और नोटबंदी के कारण इन इकाईयों की कमर टूटना कृषि आधारित उद्योगों के पिछड़ने की वजह है। ऐसे समय में हमारी सरकार फूड प्रोसेसिंग उद्योग को बढ़ावा देने की पहल कर चुकी है और हम इसका एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना चाहते हैं जो लोगों को रोजगार, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य, अर्थव्यवस्था को गति और पलायन की समस्या को कम करेगा।

सवाल- मध्यप्रदेश में समान रूप से विकास का पहिया घूमे इसकी क्या रणनीति है? - इस मुद्दे पर हमारी सरकार का प्रयास है कि हम 'एरिया स्पेसिफिक डेवलपमेंट' के सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कार्य करें। जिस क्षेत्र की जो पारंपरिक विशेषता हो उस क्षेत्र को उसी औद्योगिक क्षमता के लिए विकसित किया जाए। साथ ही उस क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण इलाकों में हम फूड प्रोसेसिंग उद्योग को भी आगे बढ़ायेंगे। अभी वर्तमान सरकार को 10 माह हुए हैं भविष्य में आपको बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। हमने 4 नए ग्रीन फील्ड टेक्सटाईल पार्क, एक केमिकल एंड फार्मा पार्क बनाने का निर्णय लिया है। यह एरिया स्पेसिफिक डेवलपमेंट के ही उदाहरण है।

सवाल- आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर मध्यप्रदेश की क्या प्लानिंग है? - हम भविष्य को देखते हुए भी कई नए प्रयास कर रहे हैं जैसे आईओटी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसी नई तकनीकों पर मध्यप्रदेश में काम प्रांरभ हो चुका है। आज कई प्रतिष्ठित आईटी कंपनियां मप्र में संभावनाओं को देख रही हैं और हम भी उनके लिए सारी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इंदौर स्थित क्रिस्टल आईटी पार्क और अन्य स्थानों पर कुल मिलाकर 19 कंपनियां कार्यरत हैं और करीब 3200 लोग इन कंपनियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और हम आगे भी इस तरह के नए आईटी पार्क निर्मित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं, हम 17 अक्टूबर को सिंहासा आईटी पार्क की शुरुआत करने जा रहे हैं।

निवेश के लिए प्रदेश में नए क्षेत्र कौन से हैं? हमारा ध्यान रोजगार निर्मित करने वाले क्षेत्रों पर है। अपने पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा, हम 'न्यू एज ईकोनॉमी' क्षेत्रों जैसे नैनो टैक्नोलॉजी, एनर्जी स्टोरेज पर भी फोकस कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में कुछ सेक्टरों में बहुत अधिक संभावनाएं है जैसे फूड प्रोसेसिंग हमारा पारंपरिक फोकस सेक्टर रहा है। प्रदेश में इस समय 10 फूड पार्क हैं जिसमें 2 मैगा फूड पार्क हैं। इस सेक्टर में अपार संभावनाएं हैं। और इसीलिए हमारी उद्योग प्रोत्साहन नीति इस क्षेत्र की कंपनियों को 50 प्रतिशत अधिक प्रोत्साहन देती है। हमारे यहां कई नामचीन कंपनियां जैसे आईटीसी, पारले एग्रो, एलटी फूड्स, कैडबरी आदि मौजूद हैं। वहीं हमारे यहां पीथमपुर एवं मंडीदीप भारत के अग्रणी ऑटो कलस्टर हैं। पीथमपुर में नेट्रेक्स एशिया का सबसे बड़ा टेस्टिंग ट्रैक है। मध्यप्रदेश में ऑटोमोबाइल सेक्टर की अधिक प्रगति के लिए निवेश की अपार संभावनाएं हैं। इसी प्रकार इंदौर, भोपाल, देवास एवं मंडीदीप में फार्मा कलस्टर मौजूद हैं। पीथमपुर एसईजेड से करीब-करीब 2.85 बिलियन अमेरीकी डॉलर का फार्मास्यूटिकल निर्यात किया जाता है। इसके अलावा मध्यप्रदेश में करीब 60 से ज्यादा बड़ी टैक्सटाइल मिल हैं जो कि इंदौर, देवास, छिंदवाड़ा, खंडवा, खरगोन और बुरहानपुर में हैं। वहीं जीएसटी के बाद मध्यप्रदेश को वेयर हाउसिंग और लॉजिस्टिक हब बनाने के लिए यहां सर्वोत्तम अनुकूल पारिस्थितियां हैं। हमने आईटी और ईएसडीएम के लिए अलग से निवेश प्रोत्साहन नीति बनाई है जिसके फलस्वरूप इंदौर, भोपाल, जबलपुर व ग्वालियर आकर्षक आईटी हब के रूप में उभर रहे हैं।

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