Shahdol News Today: शहडोल का एक शख्स पेड़ के पत्ते खाकर भरता है पेट, आखिर क्या है उसकी मजबूरी, जानिए?

शहडोल में एक बुजुर्ग शख्स अपनी भूख मिटाने के लिए यूकेलिप्टस के पत्ते और लकड़ी खाता है.

Update: 2021-11-26 13:09 GMT

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शहडोल। जीवन में समय कैसे-कैसे रंग दिखाता है। जब पेट भरने के लिए शहडोल के एक शख्स को पेड़ के पत्ते खाने पडे़। एक बार वीर महाराणा प्रताप को भी युद्ध हारने के बाद घास की रोटी खानी पड़ी थी। धीरे-धीरे शहडोल के उस शख्स की मजबूरी आदत बन गई और अब वह शख्स विगत 10 वर्ष से बडे़ मजे के साथ पेड़ के पत्ते खाकर अपना पेट भर रहा है। इस सम्बंध में जिले के चिकित्सकों का कहना है कि उनकी यह आदत एक तरह की मांशिक बीमारी है। डाक्टरों की सलाह है कि उन्हे मनोचिकित्सक के पास अपना इलाज करवाना चाहिए। लगातार पत्ते खाने से वह भले ही बीमार नहीं हुए लेकिन उनके द्वारा खाये जाने वाले यूकेलिप्टस के पत्तों में कोई भी पोषक तत्व नहीं पाये जाते।

शहडोल का रहने वाला है शख्स

मिली जानकारी के अनुसार शहडोल निवासी भूरा यावद उम्र 55 वर्ष प्रतिदिन यूकेलिप्टस के पत्तों को खाकर अपना पेट भर रहे हैं। यह क्रम विगत 10 वर्ष से चल रहा है। लेकिन उन्हे अबतक कोई परेशारी नही हुई है।

क्या कहते हैं भूरा यादव

इस सम्बंध में भूरा यादव का कहना है कि वह अक्सर जंगल में मवेशियों को लेकर चराने के लिए जाते थे। वहां भूख लगने पर पेड़ से पत्ते तोड़कर खा लेते और पेट भर जाता। भूख भी मिट जाती थी। यह क्रम काफी समय तक चलता रहा। आज हालत यह है कि वह यूकेलिप्टस के पत्तों को अभी भी खा रहे हैं। बताया जाता है कि वह बीच-बीच में फलों का सेवन भी करते हैं।

डाक्टरों का मत

इस सम्बंध में डाक्टर राजेश पांडेय का कहना है कि यह पर्वर्टेड टेस्ट कहलाता है। इसे मानसिक बीमारी के रूप में माना जा सकता है। वह भले ही अभी तक बीमार नही हुए है। लेकिन कहा नहीं जा सकता कि उनके स्वास्थ्य पर कब इसका बुरा असर पडे़। डाक्टर पांडेय ने सलाह देते हुए कहा है कि उन्हे किसी मनोचिकित्सक के पास जाकर अपना इलाज करवाना चाहिए।

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