Koo के को-फाउंडर से जानिए, कैसे चुनौतियों के पिलर से बनता है 'सफलता का ब्रिज'

भारत का अपना स्वदेशी माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफार्म Koo, बेहद कम समय में 2 करोड़ से अधिक लोगों के बीच अपनी जगह बनाने में सफल रहा है.

Update: 2022-09-27 02:38 GMT

देश में नए स्टार्टअप आइडियाज (Startup Ideas) के बूम पकड़ने के साथ भारत सबसे अधिक यूनिकॉर्न के मामले में दुनिया का तीसरा मुल्क बन गया है। देश की युवा सोच विदेशी दिग्गज कंपनियों को भी आगे रहकर चैलेन्ज कर रही हैं और प्रतिस्पर्धा के दौर में अपने हर कदम से दुनिया को अचंभित करने में जुटी हुई हैं। भारत का अपना स्वदेशी माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफार्म कू (Swadeshi Micro Blogging Platform Koo) बेहद कम समय में 2 करोड़ से अधिक लोगों के बीच अपनी जगह बनाने में सफल रहा है।

इस बहुभाषी प्लेटफार्म के जरिए क्षेत्रीय भाषा में लोगों को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी मिली है। साथ ही कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी है, पिछले दिनों अपने चौथे दौर की बिडिंग पूरी करते हुए, कू ने 44 मिलियन डॉलर का निवेश एकत्र किया है। लेकिन दूसरी ओर सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में 80 से 90 फीसदी स्टार्टअप 5 साल की अवधि पूरी करने से पहले ही असफल होकर बंद हो जाते हैं। ऐसे में एकदम नई शुरुआत के साथ, एक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में सक्सेसफुल लीडर बनने के लिए कू को-फाउंडर मयंक बिदावतका ने किन चुनौतियों का सामना किया और कैसे स्वदेशी माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफार्म को चुनौतियों के पिलर को सफलता के ब्रिज में तब्दील कर के, सैकड़ों नौजवानों के लिए प्रेरणा का काम किया है।

हमसे हुई एक खास बातचीत में मयंक ने उन सभी प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया है, जो प्रत्येक स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ-साथ अपने आउट ऑफ़ बॉक्स आईडिया से दुनिया बदलने की सोच रखने वाले युवाओं की भविष्य नीति में कारगर सिद्ध हो सकते हैं।

Koo App के सह-संस्थापक मयंक बिदावतका (Mayank Bidawatka) से हुई ख़ास बातचीत के अंश

  • कहते हैं एंटरप्रेन्योर पैदा होते हैं बनाये नहीं जाते..इसे कितना सार्थक समझते हैं?

मैं एक बिजनेस फैमिली से आता हूं। मैं अपने परिवार में नौकरी करने वाला पहला व्यक्ति था। वे हमेशा चाहते थे कि मैं पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ जाऊं लेकिन मैं इंटरनेट पर कुछ करना चाहता था। कुछ साल काम करने और फिर एमबीए करने के बाद मैं इंटरनेट से जुड़ा कोई बिजनेस करना चाहता था। मेरे एंटरप्रेन्योरशिप का सफर 2007 में शुरू हुआ और तब से मैं अपना खुद का उद्यम चला रहा हूं। मुझे इंटरनेट और इसके साथ आने वाली संभावनाएं बेहद पसंद हैं।

मेरा मानना ​​है कि कोई भी जिस चीज में व्यक्ति अपना दिमाग लगाता है उसमें कुछ भी कर सकता है। और यह मेरा संदेश हर उस व्यक्ति के लिए भी है जो अपना खुद का व्यवसाय करना चाहता है।

  • भारत में उद्यमिता विकास के लिए कौन से महत्वपूर्ण पहलु हैं? इसे कैसे प्रमोट किया जा रहा है?

स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं के अलावा भारत सरकार का कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट के लिए काफी कुछ करता है। सरकार एमएसएमई के लिए ब्याज अनुदान योजना, डेयरी उद्यमिता विकास योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, स्टैंड-अप इंडिया योजना, मेक इन इंडिया जैसी केंद्र सरकार की योजनाएं भी उद्यमियों के लिए वरदान साबित हुई हैं।

उद्यमिता विकास के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया का सरलीकरण, विकासशील औद्योगिक नीतियां, लचीली आर्थिक नीतियां, विकास संस्थानों की स्थापना, औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना और विकास, तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा का विकास, साइंस एंड टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना, सम्मेलनों-कार्यशालाओं का आयोजन, साहित्य का निर्माण, उत्पाद आधारित नीतियों की घोषणा, उद्यमिता सहायता इकाइयों की स्थापना, विशेष योजनाएं, महिला उद्यमियों का विकास, औद्योगिक नक्शे की तैयारी, वित्तीय संस्थानों की स्थापना, सब्सिडी की उपलब्धता, निर्यात संवर्धन कार्यक्रम, स्वरोजगार योजनाएं, छोटे उद्यमियों के लिए विशेष लोभ योजनाएं, शोध एवं विकास में खर्च की बढ़ोतरी, परियोजनाओं से जुड़ी रिपोर्ट की शीघ्र स्वीकृति समेत ऋण लेने में आसानी और आसान दस्तावेज प्रक्रिया इसके लिए जरूरी और महत्वपूर्ण पहलू है।

  • सरकारी तौर पर किस प्रकार के लाभ दिए जा रहे हैं? जो नए उद्यमियों के प्रोत्साहित कर रहे हैं?

ऊपर बताई गई सरकारी योजनाओं के अलावा तमाम ऐसे महत्वपूर्ण पहलू हैं, जिन पर सरकार ध्यान दे रही है। ये सभी उद्यमिता विकास के साथ ही नए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

  • कू का आईडिया कैसे आया और अभी तक के सफर में किस तरह की चुनौतियों का सामना किया?

जब हम देसी भाषा बोलने वालों के लिए एक सवाल-जवाब का मंच यानी अपना पहला प्रोडक्ट यानी वोकल (Vokal) बना रहे थे, हमे लगा कि जब ऑनलाइन अभिव्यक्ति की बात आती है, तो विशेष रूप से देसी भाषाओं में एक बहुत बड़ा अवसर मौजूद है। भारत जैसे देश में जहाँ 90 प्रतिशत से अधिक आबादी क्षेत्रीय भाषा में सोचती और बोलती है, हर व्यक्ति की मातृभाषा में अभिव्यक्ति की ताकत वास्तव में अपार है। फिर हमने बाज़ार में मौजूद अन्य उत्पादों का अध्ययन किया और लगा कि भारतीय भाषाओं में कंटेंट बेहद कम है और इसकी वजह अधिकांश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की प्राथमिकता इंग्लिश अप्रोच है जो मुख्य रूप से शहरों में रहने वाले अंग्रेजी बोलने वालों के लिए बनाए गए हैं।

व्यापक अध्ययन के बाद हमने भारतीयों के लिए अपनी मातृभाषा में व्यक्त करने और अपने भाषाई और सांस्कृतिक समुदायों से जुड़ने के लिए Koo App को एक बहुभाषी माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करना शुरू किया। हमने दिसंबर 2019 में इसे शुरू किया और मार्च 2020 में मैसूर के पास के एक जिले मांड्या से Koo को कन्नड़ में मंच लॉन्च किया। लॉन्च के समय हमें ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ा और अंततः इसने हमें अगले कुछ महीनों में इस मंच पर हिंदी को पेश करने के लिए प्रेरित किया।

जुलाई 2020 में हमने आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज में भाग लिया और भारतीयों के लिए एक गहन व्यापक भाषा अनुभव वाले मंच का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले 7,000 स्टार्टअप्स में से हम सोशल मीडिया के शीर्ष तीन ऐप में शामिल थे और अगस्त 2020 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' संबोधन में Koo का उल्लेख किया।

  • किन पक्षों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है?

अगर आप अपना स्टार्टअप शुरू करने चाहते हैं तो आपको कई बातों की जरूरत होती है। इनमें सबसे पहले आपको स्पष्ट रूप से मार्केट साइज का पता लगाना होगा। आपका प्रोडक्ट किसी इलाके के लिए फिट है, यानी वहां का भूगोल पता होना चाहिए। फिर मार्केट रिसर्च की बात आती है। ग्राहकों के आयवर्ग-आयुवर्ग और पसंद-नापसंद समेत प्रतिस्पर्धियों की रिसर्च जरूरी होती है। ग्राहकों की भावनाएं या फिर कस्टमर सेंटिमेंट्स भारत जैसे बाजार के लिए बहुत मायने रखते हैं।

रातों-रात यह सेंटिमेंट्स किसी को फर्श से अर्श पर या फिर इसका उलट करने की ताकत रखते हैं। कू ऐप में हमनें भारतीयों के सेंटिमेंट्स का भरपूर ध्यान रखा है। अपनी जुबान में अपने मन की बात कहने का जो मजा हम भारतीयों को आता है, उसे छीना नहीं जा सकता। कू ऐप के जरिये हमनें भारतीयों को उनकी भावनाएं उनके शब्दों में बयां करने का मौका दिया है और यह दिल से जुड़ा मामला है।

  • नए लीडर्स के लिए कई बार फंडिंग मिलना आसान होता है लेकिन प्रॉफिट में रहना सबसे बड़ा चैलेन्ज..कू अपने बिज़नेस को किस प्रकार मॉनिटाइज कर रहा है?

फिलहाल हमारा फोकस आगे बढ़ने और अभी कू पर ज्यादा सक्रिय रहने वाली कम्यूनिटीज हासिल करना है। इसलिए, हम मॉनेटाइज कैसे करेंगे, इस पर कमेंट करना जल्दबाजी होगी। लेकिन मोटे तौर पर, हम सभी के लिए कुछ प्रकार के विज्ञापन जारी करेंगे और क्रिएटर कम्यूनिटीज को मॉनेटाइज करने में मदद करने के तरीकों पर भी गौर करेंगे, जो बदले में हमारे मॉनेटाइजेशन की योजनाओं में भी मदद करेंगे। इस वर्ष हमें पूरी उम्मीद है कि हमसे जुड़े क्रिएटर्स को फायदा होने लगेगा और फिर हमें भी।

  • फंडिंग जुटाने की क्या प्रक्रिया होती है? विदेशी निवेशकों को कैसे आकर्षित किया जाता है?

कोई भी स्टार्टअप जब शुरू होता है तो उसके मशहूर होने की बड़ी वजह उसका आइडिया होता है। अगर आपने सही ढंग से बड़ी समस्या का आसान समाधान ढूंढ़ निकाला है और आपका प्रोडक्ट अच्छा है, तो भी आगे बढ़ने और इसे फैलाने के लिए फंडिंग की जरूरत पड़ती है। यह बात सभी को पता है कि लोग जीतने वाले घोड़े पर ही दांव लगाते हैं, हारने वाले पर कोई अपना खोटा सिक्का भी नहीं लगाना चाहता। फंडिंग जुटाने की प्रक्रिया भी कुछ ऐसी ही है। अगर आपके आइडिया में दम है और निवेशकों को इसे समझने में कोई भ्रम नहीं है, तो फंडिंग मिलना आसान रहता है। हालांकि, यह उतनी भी आसान प्रक्रिया नहीं है और इसके लिए सारे पहलू देखने के साथ ग्राउंड वर्क जरूरी है

पूरे होमवर्क के साथ तकनीक और इंडस्ट्री की समझ, भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं, लागत और मुनाफा समेत हर छोटी सी छोटी चीज का बिल्कुल वाजिब ढंग से प्रजेंटेशन शामिल है। सही निवेशकों को ढूंढ़ना और फिर उनतक पहुंचना, इसके लिए भी उचित रणनीति की जरूरत होती है। आप इसके लिए कू ऐप का ही उदाहरण ले कते हैं।

  • 23 प्रतिशत स्टार्टअप सही टीम की कमी से फेल हो जाते हैं? एक सही टीम का चुनाव कैसे और कितना महत्वपूर्ण होता है? फेल होने के और क्या कारण हो सकते हैं?

ना केवल उद्यमिता बल्कि किसी भी कार्य में सही टीम का चयन बेहद महत्वपूर्ण होता है। बगैर अच्छी टीम के जीत हासिल करना, केवल सपनों में संभव हो सकता है, हकीकत में नहीं। किसी भी व्यवसाय या स्टार्टअप में शुरुआती टीम का चुनाव बड़ी बारीकी से करना जरूरी है। टीम के हर साथी में स्किल के अलावा जीतने का जज्बा, स्पार्क और लगन होना बहुत जरूरी है। हालांकि, अच्छी टीम भी फेल हो सकती है, इसलिए सही विजन, सही डिसीजन, सही सिस्टम रखना आना चाहिए और खुद को इवॉल्व करना इनमें बहुत महत्वपूर्ण है।

वहीं, स्टार्टअप के विफल होने का सबसे आम कारण मुझे यह लगता है कि एक उद्यमी जिस आइडिया को अच्छा मानता है, जरूरी नहीं कि वह बाजार के लिए भी अच्छा हो। यह व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य नहीं हो सकता है। फिर शुरुआती समस्याएं हैं जो आगे बढ़ने के लिए बहुत कठिन हैं। ऐसा करने के लिए किसी के पास फौलादी जिगर होना चाहिए। किसी भी व्यवसाय में वित्तीय कारण भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समय पर धन की आपूर्ति नहीं होने से स्टार्टअप बंद भी हो सकता है।

  • सफलता में गुण और क्षमता निखार पर कैसे काम किया जा सकता है?

मुझे लगता है कि आमतौर पर सफलता पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं होता है। हालांकि, अगर कोई कड़ी मेहनत करता है, किसी समस्या को हल करने के लिए असल जुनून रखता है और सभी मुश्किलों का लगातार सामना करता है, तो उसके सफल होने की संभावना काफी ज्यादा है। कभी-कभी भले ही आपने तमाम वजहों से हर चीज बिल्कुल सही की हो, फिर भी आप असफल हो सकते हैं। हमारा काम केवल इसमें अपना 100% देना है। हमें ऐसी कोई भी वजह नहीं छोड़नी चाहिए जिससे बाद में खेद हो कि काश कुछ और मेहनत कर ली होती।

  • आपके नजरिये में एक सफल उद्यमी बनने का मूल मंत्र क्या है?

व्यापार के लिहाज से, जिस बाजार में आप उतरने की कोशिश कर रहे हैं वह काफी बड़ा होना चाहिए। आपको किसी ऐसे व्यक्ति के साथ साझेदारी करनी चाहिए जो समस्या के बारे में जितना हो सके उतना जुनूनी और सक्षम हो। अपनी सफलता की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए निवेशकों को आकर्षित करना और एक बेहतरीन टीम बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। बाकी सब संकल्प पर निर्भर है। व्यापार करना एक बहुत ही कठिन सफर है। ऐसा करने के लिए हर मुश्किल के खिलाफ लगातार मजबूती से खड़े रहने की जरूरत होती है। भरोसा बहुत जरूरी है। अगर भरोसा है तो एक जंग भी जीती जा सकती है। भरोसे के बिना आपके पास अपने उद्यम को सफल बनाने की इच्छाशक्ति कभी नहीं होगी।

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