Baby Corn Farming: बेबी कॉर्न की खेती कर किसान हो सकते हैं मालामाल
Baby Corn Farming: अगर किसान किसानी के माध्यम से पैसा कमाना चाहते हैं तो आज हम आपको एक बेहतरीन किसानी के बारे में बताने जा रहे हैं।
Baby Corn Farming: अगर किसान किसानी के माध्यम से पैसा कमाना चाहते हैं तो आज हम आपको एक बेहतरीन किसानी के बारे में बताने जा रहे हैं। हम किसानों से कहना चाहते हैं कि वह बेबी कॉर्न की खेती करें। बेबी कॉर्न अपने गुणों की वजह से बाजार में पैठ बनाए हुए हैं। मौजूदा खेती के हालातों पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि मक्का गेहूं चावल के बाद सबसे बढ़िया विकल्प बनकर उभरा है। मक्के की खेती कर किसान बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं।
मक्के की खेती किसानों को कई तरह से लाभान्वित कर रही है जिसमें बेबी कार्न का उत्पादन दोहरा फायदा दे रहा है। एक तो इसकी वर्ष भर में 4 फसल ली जा सकती है। तो वहीं वर्ष भर इसकी खेती करने से किसानो को अपने पशुओं के लिए हरा चार मिल जाता है।
फायदे की है खेती
बेबी कार्न के लिए बताया गया है कि यह पौष्टिकता से भरपूर होने के साथ ही बाजार में इसकी भारी द डिमांड है। बेबी कार्न मक्के की प्रारंभिक अवस्था को कहा गया है। यह अपरिपक्व अवस्था में और भी अधिक पौष्टिकता से भरपूर होता है। इसीलिए बाजार में इसकी मांग खूब है। खासकर विदेश के बाजार में महंगे दामों में बिक रहा है। ऐसे में अगर किसान इसकी खेती करते हैं तो वह भी खूब लाभ कमा सकते हैं।
किसान ले सकते हैं चार फसल
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि बेबी कार्न का उत्पादन 50 से 55 दिनों में किया जा सकता है। इस कदर किसान चाहे तो बेबी कार्न की चार फसल प्राप्त कर सकते हैं। प्रति एकड़ बेबी कार्ड के उत्पादन 4 से 6 कुंटल के करीब है। बेबी कार्न तोड़ने के बाद पशुओं के लिए डेढ़ सौ क्विंटल तक हरा चारा प्राप्त हो जाता है।
कनाडा में बेबी कार्न की मांग
जानकारी के अनुसार कनाडा में बेबी कॉर्न की मांग बहुत ज्यादा है। तभी तो हाल के दिनों में बेबी कार्न का आयात करने के लिए कनाडा ने भारत सरकार के साथ अनुबंध किया है। बेबी कार्न में कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन जैसे आवश्यक तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। जिससे इसकी मांग दिनों दिन बढ़ती जा रही है।