कांग्रेस सरकार गिराने के लिए शिवराज कांग्रेस विधायकों को दे रहे 35 करोड़ का ऑफर : MP NEWS

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Update: 2021-02-16 06:13 GMT

भोपाल/नई दिल्ली. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोमवार को मध्य प्रदेश भाजपा पर कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त (हॉर्स ट्रेडिंग) करने की कोशिश का आरोप लगाया। सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार गिराने के लिए भाजपा, शिवराज सिंह चौहान और नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस के विधायकों को 25 से 35 करोड़ तक का ऑफर दे रहे हैं। 

दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव सिंह ने यह भी दावा किया है कि मध्य प्रदेश के विधायक कर्नाटक से नहीं हैं। यहां के विधायक बिकाऊ नहीं हैं। दिग्विजय ने कहा- "मैं बिना तथ्यों के कोई आरोप नहीं लगाता। शिवराज और नरोत्तम में सहमति बन गई है। एक मुख्यमंत्री और दूसरा डिप्टी सीएम बनने का सपना देख रहे हैं। शिवराज और नरोत्तम कांग्रेस विधायकों को फोन कर रहे हैं और खुलेआम कांग्रेस के विधायकों को 25 से 35 करोड़ का ऑफर कर रहे हैं। 5 करोड़ अभी ले लो, दूसरी किश्त राज्यसभा चुनाव में और तीसरी किश्त सरकार गिराने (फ्लोर टेस्ट) के बाद दी जाएगी।"

दिग्विजय झूठ फैलाने में माहिर : शिवराज  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री कमलनाथ को ब्लैकमेल करना चाहते हैं। दिग्विजय झूठ फैलाने में माहिर हैं। उन्हें अपनी इम्पॉर्टेंस (उपयोगिता) दिखानी होगी और किसी को डराना-धमकाना होगा, इसलिए ऐसा बयान दे रहे हैं। 

1 साल पहले भी हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप लगा चुके दिग्विजय पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने जनवरी 2019 में भी भाजपा नेताओं पर कांग्रेस विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था- भाजपा नेताओं द्वारा विधायकों को 100 -100  करोड़ के ऑफर दिए गए हैं, मेरे पास उसके सबूत हैं। इस पर भाजपा के निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा था कि दिग्विजय आरोप लगाने से पहले सोचें कि 100 करोड़ की राशि होती कितनी है।

कर्नाटक में 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद गिरी थी सरकार कर्नाटक में 16 विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस-जेडीएस की 14 महीने पुरानी गठबंधन सरकार अल्पमत में आ गई थी। गठबंधन ने भाजपा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया था। फ्लोर टेस्ट में कुमार स्वामी सरकार गिर गई थी। यह राजनैतिक उठापटक जुलाई 2019 में सामने आई थी। इसके बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष में राजनैतिक आरोप- प्रत्यारोप का दौर चला था। 

क्रॉस वोटिंग में कांग्रेस ने सिद्ध किया था बहुमत कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद मध्यप्रदेश में भी सरकार के फ्लोर टेस्ट की स्थिति बनी थी। 24 जुलाई 2019 को विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने सुबह मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि पार्टी के नंबर एक और दो आदेश दे दें तो 24 घंटे में सरकार गिरा देंगे। इसके 5 घंटे बाद ही कमलनाथ ने बहुमत सिद्ध कर दिया था। विधानसभा में आपराधिक कानून (मध्यप्रदेश संशोधन) बिल, 2019 पर चर्चा के दौरान बिल पर वोटिंग हुई तो इसके समर्थन में 122 वोट पड़े जो बहुमत से 7 ज्यादा थे। 

मध्य प्रदेश विधानसभा में यह स्थिति : मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें हैं। 2 विधायकों का निधन होने से वर्तमान में 228 सदस्य हैं।

  • कांग्रेस के पास 115 विधायक हैं। (सरकार में मंत्री 1 निर्दलीय भी शामिल)
  • सरकार को अन्य 3 निर्दलीय विधायक, 2 बसपा और 1 सपा विधायक का भी समर्थन है।
  • भाजपा के पास 107 विधायक हैं। 

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