सैलरी और सेविंग्स दोनों अकाउंट में ये होता है अंतर, जानें यहां

अगर आपकी सैलरी सेविंग्स अकाउंट में जमा होती है तो इसका कोई नुकसान नहीं है.
सेविंग्स अकाउंट कोई भी व्यक्ति खुलवा सकता है. आम तौर पर जो लोग नौकरीपेशा या सैलरीड नहीं होते हैं, वे अपने फाइनेंस को मैनेज करने के लिए सेविंग्स अकाउंट खोलते हैं.
आपके पास सैलरी अकाउंट है तो आपको इसमें मिनिमम बैलेंस मैंटेन रखने कोई जरूरत नहीं होती है. सैलरी अकाउंट के साथ आपको एक निजी चेक-बुक भी मिलती है.
आपका अकाउंट कम से कम दो वर्ष या इससे ज्‍यादा पुराना है तो आपको इसमें ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है.
सैलरी अकाउंट धारक की मृत्‍यु होने पर बीस लाख रुपये तक का पर्सनल एक्‍सीडेंट इंश्‍योरेंस भी मिलता है.
अगर किसी के सैलरी अकाउंट में लगातार तीन महीने तक कोई सैलरी नही आती है तो बैंक उसे जनरल अकाउंट में बदल देता है.
सभी सरकारी और निजी बैंक अपने सेविंग्स अकाउंट पर एयर एक्सीडेंट समेत लाइफ इंश्योरेंस कवर ऑफर कर रहे हैं.
Author : Akash dubey
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