जानकर हैरान रह जायेंगे स्वामी विवेकानंद ने मांसभक्षण के सम्बन्ध में शिष्य को क्या उत्तर दिया
स्वामी विवेकानंद एक ऐसे महापुरुष थे जिनका सभी धर्म के लोगो ने आदर किया , स्वामी विवेकानन्द एक बार नदी के किनारे अपने शिष्यों को दीक्षा दे रहे थे तभी उनके एक शिष्य उनसे प्रश्न करते हैं
क्या मछली खाना ठीक है, क्या ऐसे करने में कोई पाप तो नहीं हैं. इसपर स्वामी जी ने कहा-
खूब खाओ भाई अगर इसमें कोई पाप है तो वह पाप मेरा , भारत की जनता की तरफ देखो उनके चेहरे पर कितनी दयनीयता है बड़े बड़े पेट शक्तिविहीन हाथ पैर
और न ही कुछ कर जाने की इच्छा , डरपोको की तरह रहते हैं , कायरतापूर्ण व्यवहार करते हैं,
अब देश के लोगों को मछली मांस खिलाकर उद्यमशील बना डालना होगा जगाना होगा तत्पर बनाना होगा नहीं तो धीरे धीरे
देश के सभी लोग पेड़ पत्थरों की तरह जड़ बन जायेंगे। इसीलिये कह रहा था की मछली और मांस खूब खाना — स्वामी विवेकानंद (विवेकानंद साहित्य भाग -६, पृष्ठ १४४)
अगर कोई नियमपूर्वक शाकाहारी भोजन के सेवन पर बल देते हैं तो उनसे एक रसोइया एवं उसको रखने के लिए पर्त्याप्त रुपये का प्रबंध करने के लिए कह देना।
इन सबके अलावा भारतीय समाज के उत्थान के लिए स्वामी जी का अभूतपूर्व योगदान है, स्वामी जी ने कहा था कि समाज में महिलाओं को समानता दिए बगैर कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता।
वे अस्पृश्यता के विरुद्ध थे तथा समाज में व्याप्त जातिवाद पर उन्होंने दुख व्यक्त किया था