रेलवे के 170 साल: स्टीम इंजन से वंदे भारत तक का इतिहास

भारत में पहली रेल 16 अप्रैल 1853 को चली थी। उसके बाद से अब तक भारतीय रेल में कई बदलाव देखने को मिले हैं। पढ़िए भारतीय रेल का सफर।
1853 में को में पहली पैसेंजर रेल मुंबई से ठाणे के बीच शुरू हुई थी। यह रेल भाप के इंजन से चली थीं। इसमें 14 बोगियां थी।
इसने 34 किमी का सफर एक घंटे 15 मिनट में पूरा किया था। ट्रेन में 400 लोग सवार थे।
1925 को बामबाई में 3 फरवरी वीटी और कुर्ला हार्बर के बीच पहली इलेक्ट्रिक रेल गाड़ी चलाई गई। यह ऐशिया की भी पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन थी।
इस रेल की अधिकतम स्पीड 155 किमी प्रति घंटा और औसत स्पीड 90 किमी प्रति घंटा है।
उन दिनों ऐसे इंजन को क्रोकोडाइल यानी मगरमच्छ कहा जाता था। इसे 1500 वोल्ट डीसी करंट से चलाया गया था।
2019 15 फरवरी को देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस वाराणसी से नई दिल्ली तक शुरू हुई।
इस ट्रेन की टॉप स्पीड 180 किमी प्रति घंटा है और यह 52 सेकंड में 100 किमी की रफ्तार पकड़ लेती है। वर्तमान समय में कुल 13 वंदे भारत ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हैं।
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