भोपाल की सेंट्रल जेल में पुरुषों के सामने ही कराया प्रेग्नेंसी टेस्ट

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भोपाल : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम में बुधवार को यहां उत्पात मचाने के लिए गिरफ्तार कर भोपाल केंद्रीय जेल भेजी गयी नौ अविवाहित लड़कियों में से 26 वर्षीय एक लड़की ने गुरुवार को आरोप लगाया कि उनका जेल में पुरुषों के सामने ‘प्रेगनेंसी टेस्ट’ करवाया गया. हालांकि, इस सभी लड़कियों को जमानत मिल गयी है, लेकिन जमानत मिलने के बाद एक लड़की ने जेल प्रशासन पर यह आरोप लगाया है.

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आरोप लगाने वाली लड़की ने बताया कि हमें पुरुषों के सामने ‘प्रेगनेंसी टेस्ट’ करवाने के लिए बाध्य किया गया. इस बीच, केंद्रीय जेल भोपाल के जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे ने बताया कि जेल मैन्युअल के अनुसार, महिलाओं को जेल में डालने से पहले ‘प्रेगनेंसी टेस्ट’ सहित कई ‘यूरिनल टेस्ट’ करने पड़ते हैं. नरगावे ने कहा कि इन नौ लड़कियों के टेस्ट पुरुषों के सामने नहीं हुए. जो आरोप लगाया गया है, वह झूठा है.



उधर, लड़की ने कहा कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले साल अक्तूबर में घोषणा की थी कि मध्यप्रदेश पुलिस में महिलाओं की भर्ती में फिजिकल टेस्ट में उन्हें कद में दो सेंटीमीटर की राहत दी जायेगी, लेकिन यह अब तक नहीं हुआ है. इसलिए पिछले तीन दिन से हम शहर के यादगार-ए-शाहजहानी पार्क में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने कहा कि कद में छूट देने की बजाय हमें बुधवार को जेल भेज दिया गया.

इन नौ लड़कियों ने मुख्यमंत्री चौहान के सामने बुधवार को लाल परेड ग्राउंड में जाकर उनसे अपने इस वादे को पूरा करने की मांग की थी और हंगामा किया था. इसके लिए पुलिस ने उन्हें सीआरपीए की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था और सब जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया. यहां से उन्हें बुधवार को ही जेल भेज दिया गया था.