आम्रपाली के चक्कर में ऐसे फंसे धोनी और साक्षी, जानिए क्या है Connection

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मल्टीमीडिया डेस्क। रियल एस्टेट डेवलपर आम्रपाली का गोरखधंधा तो उजागर हो ही गया, इसके चक्कर में महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी अलग उलझ गए। आरोप है कि इस कंपनी ने हजारों लोगों से एडवांस ले लिया और उनको समय पर हाउस प्रोजेक्ट पूरे करके नहीं दिए। मामला कोर्ट में गया तब भी इसके कर्ताधर्ता नहीं जागे और अब आखिरकार कंपनी का रेरा रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश देते हुए रुके हुए प्रोजेक्ट को पूरा करने का जिम्मा एनबीसीसी (नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन) को दिया है। इससे 42,000 से ज्यादा घर खरीदने वालों को राहत मिली है।

जानिए इस कंपनी के साथ धोनी और उनकी पत्नी साक्षी कैसे जुड़े तथा दोनों को कैसे विवादों का सामना करना पड़ा.

माही ऐसे फंस गए आम्रपाली के चक्कर में?
आम्रपाली ग्रुप ने सबसे पहले धोनी को अपना ब्रांड एम्बेसेडर बनाया था। धोनी ने करीब 7 साल कंपनी के लिए प्रचार किया और विज्ञापन भी शूट करवाए। 2016 में पहली बार तब धोनी को अपनी गलती का अहसास हुआ जब कंपनी की धोखाधड़ी उजागर होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी खिंचाई शुरू कर दी। मांग उठी कि धोनी खुद को कंपनी से अलग कर लें या अधूरे पड़े प्रोजेक्ट को पूरा करवा दें। विवाद बढ़ा तो धोनी ने खुद को कंपनी से अलग कर लिया।

धोनी की कंपनी के अटके 40 करोड़
मार्च 2019 में धोनी ने आम्रपाली समूह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। धोनी का कहना है कि आम्रपाली ने उनकी मैनेजमेंट कंपनी रिति स्पोर्टस मैनेजमेंट के 40 करोड़ रुपए नहीं चुकाए हैं। यह केस अभी भी चल रहा है। रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट एक स्पोर्ट्स मार्केटिंग और मैनेजमेंट कंपनी है, जिसमें धोनी की हिस्सेदारी है। क्रिकेटर के रूप में धोनी का पूरा कामकाज यही कंपनी देखती है।

धोनी के नाम पर हुआ था ऐसा करार
ताजा सुनवाई में कोर्ट की ओर से नियुक्त फोरेंसिक ऑडिटर ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी है कि आम्रपाली समूह ने रिति स्पोर्ट्‌स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के साथ संदिग्ध समझौता किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 नवंबर 2009 में किए गए ऐसे ही एक एक समझौते के तहत धोनी रिति स्पोर्ट्स के एक प्रतिनिधि के साथ तीन दिनों के लिए चेयरमैन के रूप में उपलब्ध रहते थे।

…तो साक्षी का नाम कैसे आया?
फोरेंसिक ऑडिटर की इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि धोनी की पत्नी साक्षी को आम्रपाली माही डेवलपर्स का डायरेक्टर बनाया गया था। ऑडिटर्स को कंपनी की ओर से मौखिक बताया गया कि आम्रपाली माही डेवलपर्स को रांची में एक प्रोजेक्ट के लिए शामिल किया गया है। इसके लिए दोनों पक्षों के बीच एमओयू भी साइन किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त ऑडिटर्स को यह एमओयू कभी नहीं दिखाया गया।

अब आम्रपाली का क्या होगा?
आम्रपाली का दोबारा खड़ा होना मुश्किल है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उसका रेरा रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट के खिलाफ जांच जारी है। सम्पत्तियां सीज की जा रही हैं। एक तरह से सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को दूसरी रियल एस्टेट कंपनियों के लिए नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

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