अध्यात्म

नारद के श्राप से भगवान राम नहीं रह पाए थे माता सीता के साथ, जानें वियोग का मुख्य कारण

Lord Rama
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देवर्षि नारद ब्रह्माजी के मानस पुत्रों में से एक हैं। नारद जी के इष्टदेव भगवान नारायण है।

देवर्षि नारद ब्रह्माजी के मानस पुत्रों में से एक हैं। नारद जी के इष्टदेव भगवान नारायण है। लेकिन एक बार ऐसा भी समय आया जब नारद जी ने भगवान विष्णु को ही श्राप दे दिया था। नारद के उसी श्राप की वजह से भगवान श्री हरि जब राम रूप में अयोध्या और माता लक्ष्मी सीता जी के रूप में जनकपुर में जन्म लिए। लेकिन नारद जी के श्राप की वजह से वियोग झेलना पड़ा।

प्रचलित लोक कथा

कहते हैं कि नारद जी को एक बार अहंकार हो गया था। इस अहंकार को तोड़ने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु ने एक माया रची। इस माया में एक नगरी बनाई उस नगरी में एक सुंदर राजकुमारी का स्वयंवर रचा गया। भगवान श्री हरि की प्रेरणा से वहां नारद पहुंचे। और स्वयंवर के बारे में जानकारी ले रहे थे तभी उस राजकुमारी का दीदार नारद मुनि को हो गया। नारद मुनि उस कन्या पर मोहित हो गए।

पहुंचे श्री नारायण के पास

नारद जी उस कन्या पर इतना मोहित हुए की उसके साथ हर हाल में विवाह करना चाहते थे। लेकिन उन्हें पता था इतनी रूपवान कन्या से विवाह करने के लिए उन्हें भी रूपवान होना पड़ेगा। इसी अभिलाषा को पूर्ण करने के लिए वह श्री हरि नारायण के पास पहुंच गए। सारी बात नारायण को बताने के बाद कहा कि मुझे हरी जैसा रूप चाहिए। भगवान ने तथास्तु कहा। लेकिन हरि का मतलब वानर भी होता है यह नारद जी भूल गए। भगवान के तथास्तु कहते ही नारद का चेहरा वानरों जैसा हो गया।

पहुंच गए सभा में

उस रूपवती कन्या के विवाह के लिए बुलाई गई सभा में नारद जी भी पहुंच गए। नारद जी का ऐसा चेहरा देखकर लोग हंस रहे थे। लेकिन नारद को ऐसा लग रहा था जैसे उनके सुंदर रूप को देखकर लोग हंस रहे हैं।

नहीं हुआ विवाह और दे दिए श्राप

नारद जी को जब पता चला कि उनका चेहरा तो बंदर के जैसे हो गया है। वह नारायण के पास पहुंचे। और उनसे ऐसा करने के संबंध में कारण पूछा। जिस पर नारायण ने कहा यह आपके हित के लिए किया गया है। लेकिन इसके बाद भी नारद जी का क्रोध शांत नहीं हुआ। और उन्होंने आवेश में आकर श्री नारायण को श्राप देते हुए कहा कि जिस तरह स्त्री को पाने के लिए मैं व्याकुल हुआ हूं उसी तरह आपको भी मृत्युलोक में जन्म लेना होगा और स्त्री वियोग सहना पड़ेगा।

इसी श्राप की वजह से श्री हरि नारायण जब मृत्युलोक में राम रूप में और माता लक्ष्मी जी सीता के रूप में जन्मे लेकिन विवाह के बाद इन्हें भी वियोग सहना पड़ा था।

सृष्टि के हैं आदि पत्रकार हैं नारद

नाराज जी को सृष्टि का आदि पत्रकार माना गया है। नारद जी के तमाम तरह के समाचार ले जाकर भगवान श्री हरि विष्णु को सुनाया करते थे। साथ ही कोई भी जानकारी प्रचारित करनी होती थी तो नारद जी उस जानकारी को बखूबी प्रचारित किया करते थे। इसलिए नाराज जी को सृष्टि का सबसे पहला पत्रकार माना जाता है।

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