कलेक्टर ने रिटर्न कर दिया सतना-नागौद रेलवे ट्रैक का प्रस्ताव

Satna Vindhya

सतना। मनमानी और लापरवाही का शिकार हो कर रह गए सतना -नागौद रेल लाइन के काम में ठेकेदार के साथ हित लाभ की साठगांठ में उलझे रेल अफसरों के मंसूबों पर फिलहाल पानी फिर गया है। रेल ट्रैक के एलाइनमेंट में बदलाव की आड़ में भू-अर्जन पर रोक लगवाने का रेल अफसरों का प्रपोजल कलेक्टर ने वापस लौटा दिया है। ललितपुर-सिंगरौली ब्रॉडगेज रेल प्रोजेक्ट के तहत सतना से नागौद तक बिछाये जा रहे 30Km लम्बे रेल ट्रैक के काम पर अपनी लापरवाही, मनमानी और स्वेच्छाचारिता का ग्रहण लगाने वाले रेल अफसरों को बड़ा झटका लगा है। एलाइनमेंट चेंज करने का बहाना बना कर नागौद तहसील के बम्हौर गांव के भू अर्जन पर रोक लगवाने की रेल अफसरों की साजिश नाकाम हो गई है।

कलेक्टर मुकेश कुमार शुक्ला ने अब बम्हौर का भू-अर्जन रोकने फिलहाल से इंकार करते हुए रेलवे के पत्र से संबंधित नस्ती भू अर्जन शाखा को वापस भेज दी है। कलेक्टर शुक्ला ने बताया कि अवार्ड तैयार हो चुका है और उसे बांटने की तैयारी भी पूरी कर ली गई है। नोटिफिकेशन और भू अर्जन के संबंध में इतनी लम्बी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब अंतिम दौर में रेलवे के अफसरों द्वारा अवार्ड रोकने का किया गया आग्रह बगैर ठोस आधार के स्वीकार नहीं किया जा सकता। प्रशासन अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

74 भूमि स्वामियों का अवार्ड 3 करोड़ 47 लाख
सतना-नागौद रेल ट्रैक के लिए रेलवे द्वारा कराये गए सर्वे के अनुसार 74 भूमि स्वामियों की भूमियों का अर्जन किये जाने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। एसडीएम नागौद ने इन भूमि स्वामियों से 10.308 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने के लिए 3 करोड़ 47 लाख 95 हजार 3 रुपए की अवार्ड राशि वितरित किये जाने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन इससे पहले कि अवार्ड वितरण शुरू हो पाता रेल अफसरों ने परियोजना का शिलान्यास रेल राज्य मंत्री द्वारा किये जाने के महीनों बाद एलाइनमेंट चेंज करने का नया राग अलापना शुरू कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया को यहां तक पहुंचाने में प्रशासन को दो साल से भी ज्यादा वक्त लग चुका है।



अचानक सामने आया अड़ंगा
भूमाफिया, ठेकेदार और रेल अफसरों के नेक्सस के हत्थे चढ़ गए सतना-नागौद के प्रस्तावित रेल ट्रैक के लिए भू अर्जन की कार्यवाही में रूचि न लेने वाले रेल अफसरों ने अपनी लापरवाहियों का ठीकरा प्रशासन के राजस्व अमले पर दे मारा। रेल अफसरों ने कह दिया था कि प्रशासन भू अर्जन नहीं कर रहा जिसके कारण काम प्रभावित हो रहा है। जब बात खुली और रेल अफसरों की ही खामियां सामने आई तो 6 जून को कलेक्ट्रेट की भू अर्जन शाखा में 31 मई की तारीख का पत्र पहुंचा दिया गया। तभी भू अर्जन रुक जाने की हवा भी फैला दी गई। इस पत्र में भू अर्जन रोकने की मांग करते हुए रेलवे के कार्यकारी अभियंता ने एलाइनमेंट चेंज किये जाने का जिक्र किया था। जब फाइल कलेक्टर को भेजी गई तो उन्होंने इस सम्बन्ध में तमाम जानकारियां हासिल की और बम्हौर के भू अर्जन पर रोक लगाने की रेल अफसरों की मांग मानने से फिलहाल इंकार कर दिया। उन्होंने फाइल भू अर्जन शाखा को वापस लौटा दी।

हर कोई रह गया था हैरान
रेल ट्रैक बिछाने का काम पूरा करने के लिए रेल राज्य मंत्री ने शिलान्यास समारोह के मंच से ही 2020 की डेड लाइन तय कर दी थी। काम शुरू कर दिया गया था और भू-अर्जन का काम भी साथ साथ चल रहा था। लेकिन इसी बीच अचानक रेल अफसरों का नया अड़ंगा जब सुर्खियों में आया तो हर कोई हैरान रह गया। सांसद ही नहीं अन्य रेल अफसरों को भी यह समझ में नहीं आया कि आखिर ऐसा कैसे हो गया? अपने ही किये सर्वे में जो चीज पहले नहीं दिखी वह अचानक अब कैसे दिख गई ? क्या पहले आंखें बंद थीं या अब इरादा डगमगा गया? सांसद गणेश सिंह ने मामला संज्ञान में आने के बाद हैरानी जताते हुए पमरे के जीएम और कलेक्टर सतना से बात कर भू अर्जन पर रोक न लगाने और एलाइनमेंट चेंज न करने को कहा था।

रेलवे द्वारा बम्हौर में भू अर्जन रोके जाने के लिए भेजा गया पत्र बगैर किसी कार्यवाही के वापस लौटा दिया गया है। अब प्रशासन अपना काम करेगा और प्रक्रिया जारी रहेगी।-मुकेश कुमार शुक्ला ,कलेक्टर

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