रीवा: पेट्रोल-डीजल केर बढ़त दाम, रिमहा परेशान1 min read

Rewa

रीवा। पेट्रोलियम पदार्थों में बढ़ती महंगाई से उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं और पिछले कुछ माह से पेट्रोल के दाम जिस तरह से बढ़ रहे हैं उससे लोग मान रहे हैं कि यह आंकड़ा 100 रुपए की ओर जल्द ही पहुंच जाएगा। रीवा में 88.28 रुपए पेट्रोल इन दिनों विक्रय हो रहा है। 100 का आंकड़ा पाने के लिए महज 11 रुपए ही शेष हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की जुबान से सहज ही निकल जाता है कि अब पेट्रोल तो 100 रुपए ही समझा जाए। तो वहीं सरकार के प्रति लोगों में आक्रोश भी है कि सरकार पेट्रोलियम के दाम को कम करने के लिए अभी तक कोई कदम नहीं उठा रही है। अन्य वस्तुओं में जीएसटी लागू की गई। जबकि पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी से मुक्त रखा गया। जरूरत है कि इसे भी जीएसटी के दायरे में लाया जाए तो वहीं बेतहाशा टैक्स पर सरकार कंट्रोल करे तो निश्चित तौर पर पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में गिरावट आएगी और उपभोक्ताओं को राहत मिल पाएगी। लोगों का कहना है कि इसके लिए सरकार को कोई रास्ता निकालना चाहिए।

इस तरह बढ़ा दाम

आए दिन बढ़ रहे पेट्रोलियम के दाम का आंकड़ा आम जनमानस जुटा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के कीमतों में गिरावट आने के बाद भी कीमतें बढ़ रही हैं। 31 अगस्त को पेट्रोल 85.85 रुपए बिक्री हुआ था तो वहीं 12 सितंबर को कीमतों में फिर उछाल आया और 88 रुपए से ज्यादा कीमत पर बिक्री हो रहा है। इसी तरह डीजल 76 रुपए से 78 रुपए 28 पैसे प्रति लीटर पहुंच गया है।

सरकार और डीलरों की चांदी

पेट्रोल डीजल के दाम लगातार बढ़ जाने से सरकार अपना खजाना भर रही है तो वहीं डीलरों को इसका अतिरिक्त लाभ हो रहा है। राजस्थान, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल सरकार ने वैट टैक्स घटाकर जनता को राहत दी है। तो वहीं अब प्रदेश के लोग भी सरकार से राहत की उम्मीद लगा रहे हैं। मप्र सरकार पेट्रोल, डीजल पर सबसे अधिक वैट टैक्स वसूलने के अलावा कई अन्य टैक्स भी ले रही है। जिससे सरकार का खजाना भर रहा है। तो वहीं आए दिन पेट्रोलियम के दाम बढ़ने से डीलरों के पास जो पुराना स्टाक रहता है वह दूसरे दिन मुनाफे के रूप में आ रहा है।

हो चुका है विरोध

पेट्रोलियम में महंगाई का बम लगातार फटने से देशभर में उबाल भी आ चुका है। 10 सितंबर को विभिन्न राजनैतिक संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन करते हुए महंगाई के खिलाफ भारत बंद करा चुके हैं बावजूद इसके सरकारें अभी तक महंगाई को कम करने के लिए कोई ठोस रणनीति नहीं ला पा रही है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं को लगातार महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है।

महीने भर बढ़े दाम

पेट्रोलियम के दामों पर नजर दौड़ाई जाए तो जून में 82.68 रुपए, पेट्रोल तथा डीजल 72.41 रुपए तथा जुलाई में फिर रेट बढ़ा और 83.52 तथा डीजल 72.92 रुपए तो वहीं अगस्त में 85.85 तथा डीजल 75.53 रुपए और अब सितंबर में 88.28 रुपए पेट्रोल तथा 78.48 रुपए में डीजल उपभोक्ताओं को खरीदना पड़ रहा है।

कमाई का एक हिस्सा पेट्रोल में खर्च

सेल्स मार्केटिंग का काम करने वाले मनोज कुमार का कहना था कि पेट्रोलियम के दाम बढ़ जाने से पूरा भार पॉकेट मनी पर उनके आता है। सेल्स का काम होने से वे हर समय वाहन का उपयोग करते हैं। रेट में गिरावट आए तो काम में भी और निखार वे ला पाएंगे। अन्यथा जो भी इनकम है वह पेट्रोल में खर्च कर रहे हैं।

कन्या कॉलेज की छात्रा रश्मि सिंह का कहना था कि तेल के दाम इतने ज्यादा हो गए हैं कि 100-200 रुपए का तेल कैसे खर्च हो जाता है पता ही नहीं चल पाता। जबकि पहले दाम कम होने पर इतने ही पैसे में वे तेल डलवाकर 15 दिन कॉलेज का सफर पूरा कर लेती थीं।

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