BJP

रीवा: हज़ारों भाजपाई कार्यकर्ता पार्टी को अलविदा कहने की तैयारी में, कांग्रेस डालने लगी डोरे

Madhya Pradesh Rewa

रीवा. आखिरकार जिले में भाजपा के भीतर चल रहा अंतर्कलह सोमवार को बाहर आ गया। भाजपा अजा मोर्चा के 15 पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा देकर न केवल भाजपा की शुचिता पर सवाल उठाया है, अपितु भाजपा नेताओं के दलित हिमायती होने के मुखौटे को भी बेनकाब किया है।

इन दलित नेताओं ने मीडिया के सामने आकर स्पष्ट किया है कि जिले में भाजपा जैसी दिखती है वैसी है नहीं। यहां तक आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ नेता पार्टी को बंधक बनाकर ठेकेदारी कर रहे हैं। वह पार्टी संगठन के पदाधिकारियों को अपनी ड्योढ़ी में मत्था टेकने तक ही सीमित रखना चाहते हैं। खासतौर से दलित नेताओं का पार्टी में सम्मान नहीं है। यह इस वर्ग के नेताओं को पार्टी में बंधुआ व दरी बिछाने वाला ही समझते हैं। यहां के नेताओं के कथनी और करनी में अंतर है। इन दलित नेताओं के आर्तनाद का असर भले ही अभी भाजपा नेताओं को समझ में न आ रहा हो लेकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे। सूत्रों की मानें तो एक हजार से अधिक अजा व अजजा कार्यकर्ता व पदाधिकारी जल्द ही भाजपा को अलविदा कहने की तैयारी में हैं। इनमें कई नेताओं पर कांग्रेसियों ने डोरा डालना भी शुरू कर दिया है।

यहां उल्लेखनीय है कि केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण कर एससी एसटी एट में संशोधन कर दलितों की हिमायती होने का सबूत पेश किया। पूरे देश के सवर्ण ने आंदोलन प्रदर्शन कर संशोधन आदेश का विरोध भी किया। लोगों ने भाजपा को सवर्ण विरोधी भी करार दिया, लेकिन जिस तरह से रीवा भाजपा के दलित नेताओं द्वारा सवर्ण भाजपा नेताओं पर अपमान करने का आरोप लगाकर पार्टी के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दिया गया उसने पार्टी के सबका साथ, सबका विकास के कथित उद्देश्य पर पानी फेरा है।

भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री रामायण साकेत व जिला महामंत्री सरोज रावत व अन्य पदाधिकारियों ने साफतौर पर कहा कि जिले में भाजपा के नेता पार्टी के सिंद्धातों के विपरीत काम कर रहे हैं। पंडित दीनदयाल के अंत्योदय व समाज के अंतिम छोर के व्यक्ति के उत्थान की बात केवल भाषणबाजी तक ही सीमित हैं।

दलित नेताओं ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों की सराहना कर यह बताने की कोशिश की है कि केवल रीवा के भाजपा नेता ही सामंती विचारों के पोषक हैं। यदि रीवा में लगी आग अन्य जिलों में पहुंची और पद से इस्तीफा देने वाले अजा पदाधिकारी दूसरे दलों का दामन थामते हैं तो यह भाजपा के लिए बड़ी क्षति साबित हो सकती है। जरूरत इस बात की है कि भाजपा के बड़े नेता ऐसे नेताओं को जो पार्टी को आघात पहुंचा रहे हैं और पार्टी उन पर लगाम लगाने का इंतजाम नहीं करती तो आगे आने वाले समय में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

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