साहब! बस इतना बता दें, हमारे शांति के टापू रीवा में इतने तमंचे-गोलियां आखिर आते कहाँ से हैं….

Rewa

रीवा रियासत


साहब ! इतने तमंचे और गोलियां शहर में कहां से आते हैं फायरिंग की लगातार घटनाओं के बाद जिले की जनता पुलिस के आला अफसरों से इस सवाल का जवाब जानना चाहती है। लेकिन अफसर ठोस जवाब नहीं दे पा रहे। पुलिस की कार्रवाई हथियारों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी पर आकर अटक जाती है। जबकि मौत का सामान बेचने वाले और अपराधी आए दिन अवैध हथियारों का उपयोग कर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। जबकि ऐसे हथियार रीवा के युवावर्ग को आपराधिक गतिविधियों में लिप्त करते जा रहें हैं।

हाल ही में हुईं गैंगवार की घटनाएं और मौके से बरामद 9 एमएम पिस्टल के खोखे चीख-चीख कर कह रहे हैं कि रीवा अवैध हथियारों की मण्डी बन चुकी है। जहां ऐसे हथियार तक आसानी से खरीदे-बेचे जा रहे हैं जो पुलिस या सेना के अफसरों को ही मिल सकते हैं। जी हां हम उसी 9 एमएम पिस्टल की बात करने जा रहे हैं जो केवल डिफेंस व शासन सप्लाई के नाम से जानी जाती है। इसका लाइसेंस भी सामान्य व्यक्ति को नहीं दिया जाता है। बीते दो हफ्ते में हुई वारदातें ही सत्ता पक्ष के नेताओं सहित आम आदमी के माथे पर चिंता की लकीरे खींचने के लिए काफी हैं।

एक दर्जन से अधिक वारदातें

जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में बीते एक पखवाड़े में गोली चलने की एक दर्जन से ज्यादा वारदातें सामने आईं हैं। जबकि पुलिस कुल 9 स्थानों पर गोली चलने की घटनाएं स्वीकार कर रही है। हर मामले में अपराध दर्ज कर पुलिस अफसर जांच का राग अलाप रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस के हाथ अगर कुछ है तो वह है घटना स्थल पर मिले बुलेट के खोखे। अफसर इसका श्रोत तलाशने की बजाय अपराधी पकड़ने की बात कर रहे हैं।



बीते साल 516 मामले दर्ज, एक में भी तस्कर तक नहीं पहुंच पाए

एक जनवरी 2017 से लेकर 31 दिसम्बर 2017 तक पुलिस ने कुल 516 आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज किए हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आर्म्स एक्ट में पुलिस तमंचे जब्त कर आरोपी को जेल भेज देती है। लेकिन जांच में यह पता लगाने की जहमत नहीं उठाती कि आखिर व कट्टे, पिस्टल, तमंचे कहां से आते हैं। इन्हें बनाने और बेचने वाला कौन है। किस मार्ग से आते हैं और कहां बिकते हैं।

जिले में इतने लाइसेंसधारी

अगर जिला कलेक्ट्रेट से बात करें तो रीवा जिले में 1285 भरमार, 12 बोर की कुल 2616, रायफल 315 की 848, रिवाल्वर कुल 56, पिस्टल के 23 लाइसेंस शासन द्वारा जारी किए गए हैं। जिसमें तकरीबन 700 लाइसेंस नई शस्त्र नीति के तहत निरस्त भी किए गए। साथ ही नई शस्त्र नीति में लाइसेंस बनने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है। इसके बावजूद राजनीतिक पहुंच एवं कंडिशनल लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। जारी लाइसेंस में भी बुलेट की संख्या सीमित व जांच के दायरे में रखी गई है। इन्हें कोटे से अधिक कारतूस नहीं दिए जाते।

पंद्रह दिन में हुए दो गैंगवार

बीते 15 दिन में गैंगवार की दो घटनाएं हुईं हैं। पहला गैंगवार सिविल लाइन थाना अंतर्गत महाराजा होटल के पास स्मोंटी व संजय द्विवेदी रॉक के बीच हुआ था। यह गैंगवार अधिपत्य को लेकर होना बताया जा रहा है। जबकि दूसरा गैंगवार गांजा तस्करी पर अधिपत्य स्थापित करने को लेकर रायपुर कर्चुलियान थाना अंतर्गत कोष्टा में हुआ था। दोनों ही मामलों में पुलिस मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश कर रही है।

कीमत पर एक नजर

नाम न छापने की शर्त पर हथियारों के सप्लायर ने बताया कि 315 बोर का देशी कट्टा 3 से 5 हजार में, अलीगढ़ की बनी हुई रिवाल्वर 15 से 20 हजार, बांदा की बनी हुई पिस्टल 25 हजार, देशी 315 बोर की बंदूक 5 से 7 हजार रुपए में दी जाती है। पैसा पहले लेने के बाद सप्लाई एक महीने बाद दी जाती है। यहां आने वाली खेप यूपी से आती है। जिसमें करछना, मिर्जापुर, अलीगढ़, कोशाम्बी आदि शामिल हैं।

लगातार अवैध असलहे पर नजर रखी जा रही है। धरपकड़ की जा रही है। इस दिशा में भी काम किया जा रहा है कि आखिर ये असलहे कहां से आते हैं। -आशुतोष गुप्ता, एडिशनल एसपी, रीवा।

लगातार इस बात की निगरानी की जा रही है कि अवैध हथियार मिलने की स्थिति में यह पता किया जाए कि आखिरकार असलहों का सौदागर कौन है और किस मार्ग से रीवा पहुंचते हैं। -उमेश जोगा, आईजी, रीवा रेंज।



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