रीवा : भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध, यहां एससी-एसटी एक्ट की मटकी फोड़ी गई1 min read

Rewa

रीवा। एससी-एसटी एक्ट में सरकार द्वारा संशोधन कर नया अध्यादेश लाए जाने का विरोध तेज होता जा रहा है। इस पर अब भाजयुमो के नेता ने ही मोर्चा खोल दिया है। कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए एससी-एसटी एक्ट की मटकी फोड़ी।

शहर के मैदानी तिराहे में जुटे कार्यकर्ताओं ने एक्ट में संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो व्यवस्था दी थी वह बेहतर थी। उसे ही आगे भी जारी रखा जाए। भाजयुमो के कॉलेज आउटरीच कमेटी के प्रदेश सह संयोजक बृजेन्द्र गौतम के नेतृत्व में दर्जनों कार्यकर्ता मैदान में विरोध के लिए उतर आए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब सत्ताधारी दल के नेताओं की ओर से ही एक्ट में संशोधन के विरुद्ध आवाज उठाई जा रही है। बृजेन्द्र ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा वर्षों की सुनवाई के बाद स्पष्ट एक्ट को संशोधित करते हुए जांच के प्रावधान के साथ लागू किया गया। जिससे इस एक्ट का दुरुपयोग बंद हो जाए लेकिन देश के जातिवादी राजनैतिक दबाव के चलते सरकार ने अध्यादेश पास कराया है।

लोकसभा और राज्यसभा के 788 सांसदों ने बिना किसी विरोध के पास कर दिया, जिसके चलते उन सभी से सवाल पूछे जाएंगे कि कुछ तो संशोधन की मांग कर सकते थे लेकिन ऐसा क्यों नहीं किया। जन्माष्टमी का त्योहार आ रहा है, इसी के चलते इस वर्ष दही की मटकी फोडऩे के बजाय एससी-एसटी एक्ट की मटकी फोड़ी जा रही है। समाज दो वर्गों में विभाजित होता जा रहा है। जब तक संशोधित बिल नहीं लाया जाएगा तब तक यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

बृजेन्द्र गौतम का कहना है कि यह पार्टी का निर्णय नहीं है, उनकी अंतरात्मा ने आवाज दिया इस कारण संशोधन की मांग कर रहे हैं। मैदानी में हुए प्रदर्शन में दयाकान्त शुक्ला, शिवम गौतम, रितिक मिश्रा, ऋषभ शर्मा, विवेक मिश्रा, अपूर्व मिश्रा, आशीष तिवारी, अजय तिवारी, मोनू शुक्ला, आदर्श त्रिपाठी, अरुण यादव, अमित सोनी, प्रकाश तिवारी, अरविंद पाठक, मंटू पांडेय, अरविंद मिश्रा, राजेश गौतम, वैभव तिवारी, अमित त्रिपाठी, गौरव, रोशन, संदीप, सुमित, रवी, लालजी, नानू, निखिल, सचिन, रोहित , रितिक त्रिवेदी सहित अन्य कई मौजूद रहे।

दीनदयाल धाम पडऱा से हुई शुरुआत
एससीएसटी एक्ट के विरोध में मटकी फोडऩे का प्रदर्शन शहर के वार्ड-तीन के दीनदयाल धाम पडऱा से हुई। वहां पर भी भाजयुमो नेता बृजेन्द्र गौतम ने इसकी शुरुआत की और कहा कि सच बोलने के लिए किसी संगठन की लकीर में नहीं बंध सकते। एक देश-एक कानून होना चाहिए, सबको अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

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