रीवा: हंगामे के बाद हुई खुदाई, खुला रहस्य, ननि परिसर में दफ़न थें कई मवेशी1 min read

Rewa

रीवा। जिस दफ्तर में बैठकर नगर निगम के आला अफसर रोज शहर को साफ-सुथरा बनाने की कार्ययोजना बनाते हैं उसी कार्यालय के परिसर में ननि कर्मचारियों ने एक-दो नहीं बल्कि 7 मृत मवेशियों के शव दफना रखे थे। नगर निगम के परिसर से तेज बदबू आने पर आसपास के लोगों की शिकायत और कांग्रेस पार्षदों के विरोध प्रदर्शन के बाद जब रविवार को जेसीबी से खुदाई की गई तो 7 मृत मवेशियों के शव बरामद हुए। इस दौरान महापौर ममता गुप्ता सहित विपक्षी पार्षद और नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे। इन शवों को ननि प्रशासन वाहन में भरकर ले गया। जिसके बाद स्थानीय लोगों के साथ ननि प्रशासन ने राहत की सांस ली।

पहले ननि अफसर टाल गए

नगर निगम कार्यालय के परिसर से जर्बदस्त बदबू आने पर लोगों ने इसकी सूचना पहले तो ननि प्रशासन को दी, लेकिन अफसर शिकायत को टाल गए। बाद में बात मीडिया तक पहुंचने के बाद नगर निगम परिषद के नेता प्रतिपक्ष अजय मिश्रा बाबा सहित कांग्रेस पार्षद और कांग्रेस नेता मौके पर पहुंच गए। जहां मिट्टी के ढेर से आ रही बदबू और उसके पास पड़े नमक के पैकेट आदि देखकर शव दफन होने का शक पुख्ता हो गया। खुदाई के बाद शिकायत सच साबित हुई।

सड़क पर बैठे कांग्रेसी तब शुरू हो पाई परिसर में खुदाई

मौके पर पहुंचे कांग्रेसी पार्षद और पदाधिकारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। जिसकी जानकारी लगते ही सिविल लाइन थाना प्रभारी और नायब तहसीलदार हुजूर मौके पर पहुंचे, लेकिन नगर निगम प्रशासन का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी नहीं पहुंचा। जिसके चलते कांग्रेसी पार्षद नगर निगम कार्यालय के सामने सड़क पर बैठ गए और विरोध शुरू कर दिया। जिसके बाद महापौर ममता गुप्ता, आयुक्त आरपी सिंह, स्वास्थ्य अधिकारी अरूण मिश्रा, कार्यपालन यंत्री शैलेन्द्र शुक्ला, परिषद अध्यक्ष सतीष सोनी सहित पूरा अमला मौके पर पहुंचा। कांग्रेस की तुरंत एक्शन लेने की जिद के बाद जेसीबी सहित डंपरर, ट्रैक्टर आदि बुलाए गए और खुदाई कराई गई।

वार्ड 12 से लाए गए थे मृत मवेशी
ननि के कर्मचारियों की मानें तो वार्ड-12 में मृत मवेशी पड़े होने की सूचना पर कर्मचारी उन्हें लेकर बाईपास गए थे, लेकिन कोष्टा बाईपास में शव को ठिकाने लगाने के लिए उन्हें स्थान नहीं मिला। उनका कहना था कि स्थानीय लोग लगातार इसका विरोध कर रहे हैं और विरोध के चलते मृत मवेशियों को ठिकाने लगाने की जगह न होने की स्थिति में वे रात के अंधेरे में नगर निगम कार्यालय परिसर में ही खुदाई करके शव को मिट्टी के नीचे दबा दिया था।

सामने मौजूद है मंदिर
विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि इससे बड़ी विडम्बना क्या होगा कि नगर निगम कार्यालय होने के साथ-साथ जिस स्थान पर मृत मवेशियों को दफनाया गया था उससे 20 कदम की दूरी पर ही नगर निगम प्रशासन द्वारा बनवाया गया मंदिर स्थित है। तो वहीं व्यंकट मार्ग और रानीगंज सहित आसपास रहवासी क्षेत्र होने के साथ-साथ व्यवसायिक क्षेत्र स्थित है। जिसके चलते हर समय सैकड़ों लोगों की मौजूदगी आसपास के क्षेत्र में बनी रहती है। जबकि नगर निगम कार्यालय समय में शहर के 45 वार्ड के रहवासी प्रतिदिन अपने कार्य से कार्यालय पहुंचे हैं। समय रहते शव को बाहर नहीं निकाला जाता तो लोगों का रहना मुश्किल हो जाता और सड़ांध बदबू के चलते महामारी का खतरा भी बढ़ने की आशंका स्थानीय लोग जताते रहे। हालांकि विरोध-प्रदर्शन होने के चलते अविलंब ननि प्रशासन सक्रिय हुआ और मवेशियों का शव बाहर निकाला गया।

तब मची भगदड़
कार्यालय परिसर में मिट्टी के ढेर में खुदाई के दौरान जैसे ही मृत मवेशियों के शव सामने आए उससे निकलने वाली बदबू से आसपास का पूरा माहौल बदबूदार हो गया और मौजूद लोगों में इधर-उधर भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई। खुदाई के दौरान एक-एक करके मवेशियों के शव लगातार निकल रहे थे।

इससे बड़ी विडम्बना और क्या होगी जब नगर निगम के अपने ही कार्यालय परिसर में मृत मवेशियों को दफनाया जा रहा है। इससे यह साफ जाहिर है कि ननि प्रशासन का कर्मचारियों पर और शहर की व्यवस्था को बनाने में नाकाम साबित हो रहा है। हमारी मांग है कि इसकी जांच करवाई जाए। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और स्वयं ननि प्रशासन इसके लिए दोषी भी है। वरिष्ठ अधिकारी इसे गंभीरता से लें। -अजय मिश्रा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम।
निश्चित तौर पर यह बड़ी लापरवाही है। इसकी जांच करवाई जाएगी। जो भी दोषी होगा संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -ममता गुप्ता, महापौर।
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