रीवा : दुष्कर्म पीडि़ता एफआइआर दर्ज कराने रात भर पुलिस थाने में बैठी रही, फिर हुआ ये1 min read

Rewa

रीवा। दुष्कर्म पीडि़ता को तत्काल मदद देने में पुलिस सक्षम नहीं है। स्थित है कि थाने में एफआइआर तक दर्ज नहीं हो पा रही है। 13 साल कि लाडली के साथ हुए दुराचार की एफआइआर लिखाने रात भर थाने में पीडि़ता व मां बाप बैठे रहे है। इसके दूसरे दिन 35 किलोमीटर दूर रीवा आकर महिला थाने में एफआइआर दर्ज कराई। पुलिस की इस कार्यप्रणाली ने महिला अपराधों के प्रति तंत्र की बड़ी असंवेदनशीलता उजागर की है।

बताया जा रहा गुढ़ अंतर्गत ग्राम हर्दी में घर से शौच के लिए निकली 13 साल की किशोरी को गांव में रहने वाला आरोपी दीपेन्द्र यादव मुंह दबाकर घर से कुछ दूर नहर में ले गया। इसके बाद वहां १२ बजे रात तक उसके साथ दुराचार किया इसके बाद पीडि़ता को छोड़ कर भाग निकला। वहां से छूटने के बाद किशोरी ने घर आकर अपने माता पिता को जानकारी दी। इसके बाद परिजन गुढ़ थाना पहुंचे। लेकिन वहां रात भर एफआइआर दर्ज नहीं हुई। पुलिस वालों ने सुबह परिजन को महिला थाने भेज दिया। जहां पीडि़ता की शिकायत पर महिला थाने में मामला दर्ज हुआ। इस मामले मेंं पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

 

पुलिस मामला दबाने देती रही दबाव
पीडि़ता के पिता ने बताया कि इस मामले में पुलिस पूरी रात उन्हें मामला झूठा बताते हुए वापस जाने का दबाव बनाती रही है। पहले गुढ़ थाना में पुलिस कर्मियों ने परिजनों पर दबाव बनाते रहे हैं। लेकिन बेटी को न्याया दिलाने के लिए आडिग माता-पिता ने अंत में आकर महिला थाने में रिपोर्ट लिखाई। यहां भी महिला थाना प्रभारी ने पहले पीडि़ता की शिकायत लिखने से इंकार किया। फिर बाद में एफआईआर दर्ज की।

थानों में नहीं है महिला डेस्क
निर्भया कांड के बाद सभी थानों में दुष्कर्म पीडि़ता की मदद व एफआइआर दर्ज करने महिला डेस्क गठित किया जाना है लेकिन अभी तक थानों में महिला डेस्क नहीं है। इसके कारण दुष्कर्म से पीडि़ता को एफआइआर लिखाने में बड़ी परेशानी उठानी पड़ती है।

महिला अपराध प्रकोष्ठ करेगा जांच
महिला थाना प्रभारी अराधना सिंह ने बताया कि पीडि़ता की शिकायत में एफआईआर दर्ज किया गया है। परिजनों के आरोप निराधार हैं। इस मामलें पास्को एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है वहीं मामले की विवेचना महिला अपराध प्रकोष्ठ कर रहा है।

Facebook Comments