रीवा : सरकार के इस फैसले से कांग्रेस में ख़ुशी की लहर, भाजपा कोर्ट जाने की तैयारी में... 1

रीवा : सरकार के इस फैसले से कांग्रेस में ख़ुशी की लहर, भाजपा कोर्ट जाने की तैयारी में…

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नगर पालिक विधि संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुमोदन हो गया। अध्यादेश लागू होने पर नगरीय निकायों में अब करीब 20 साल बाद फिर से जनता के बजाय पार्षद महापौर व अध्यक्ष को चुनेंगे। अब नगर निगम के महापौर के दावेदारों को पहले पार्षदी का चुनाव जीतना होगा। भाजपा पंचायत से जिला तक चलाएगी हस्ताक्षर अभियान नगरीय निकाय चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से कराने के विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर ली है विरोध की रणनीति बनाने के लिए गुरुवार को बीजेपी प्रदेश कार्यालय में एक अहम बैठक हुई जिसमें तय किया गया कि मेयर चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से कराए जाने का हर स्तर पर विरोध करेगी। जिसके अंतर्गत बीजेपी नेता जिलों से लेकर पंचायत तक हस्ताक्षर अभियान चलाएंगे और इन हस्ताक्षर को राज्यपाल तक भेजेंगे।

बीजेपी मेयर और नगर पालिका अध्यक्षों के चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से कराए जाने का भी विरोध कर रही है। भाजपा का कहना है, दल-बदल रोकने के लिए भी कानून सरकार बनाए। इसके लिए अध्यादेश लाए सरकार प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव में बदलाव को लेकर सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश पर राज्यपाल का फैसला सर्वमान्य है, लेकिन इससे पार्षदों की खरीद-फरोत रोकने के लिए सरकार को नगरीय निकायों में दल-बदल रोकने का कानून लागू करना चाहिए। इसके लिए भी सरकार अध्यादेश लाए। कोर्ट जाने की तैयारी में बीजेपी बीजेपी इस विधेयक के विरोध में हाईकोर्ट जाने की भी तैयारी कर रही है। मामला पहले ही केन्द्रीय नेतृत्व के पास पहुंच चुका है। बीजेपी शुरु से ही इस बिल का विरोध कर रही है और लागू होने से पहले सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन और फिर कोर्ट जाने की तैयारी में है।

इस संबंध में नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा की चार सदस्यीय प्रदेश स्तरीय टीम का गठित है, जिसमें पूर्व सांसद कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व महापौर उमाशंकर गुप्ता, शेजवलकर विवेक एवं रीवा के पूर्व महापौर राजेन्द्र ताम्रकार शामिल हैं। राजेन्द्र ताम्रकार ने बताया कि जल्द ही समिति की बैठक में रणनीति पर विचार होगा। कमेटी कोर्ट जाने के ग्राउंड पर भी विचार करेगी। बढ़ेगी खरीद फरोत पूर्व महापौर राजेन्द्र ताम्रकार का कहना है कि नगरीय निकाय चुनाव में बदलाव के लिए लाए गए अध्यादेश से पार्षदों की खऱीद-फरोत बढ़ेगी। पार्षदों की खऱीद-फरोत रोकने के लिए सरकार को नगरीय निकायों में भी दल बदल कानून लागू करना चाहिए। इसके लिए भी सरकार अध्यादेश लाए। सरकार धनबल, बाहुबल ओर सााबल के आधार पर गिने-चुनें पार्षदों को प्रभावित करेगी। आम मतदाता की आवाज का कोई महत्व नहीं होगा।

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