रीवा के बेरोजगारों और किसानो के लिए आ गया पैसा कमाने का जरिया, बस इसे लगवाए और लाखो कमाए । 1

रीवा के बेरोजगारों और किसानो के लिए आ गया पैसा कमाने का जरिया, बस इसे लगवाए और लाखो कमाए ।

Rewa

रीवा। अभी तक खेती से किसान लाभ कमा रहे थे लेकिन बंजर या गैर कृषि उपयोग की भूमि से कोई लाभ नहीं हो रहा था। सरकार ऐसी भूमि का उपयोग कर उसमें बिजली उत्पादन करने का विकल्प दे रही है। इसके लिए किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान(कुसुम) योजना शुरू की जा रही है।

अब किसान अपनी भूमि पर सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन कर उसे खेती के उपयोग में ले सकेगा, साथ ही जो अधिक बिजली होगी उसे सरकार खरीदेगी। केन्द्र सरकार ने योजना का मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को लागू करने के लिए भेजा है। जहां से रीवा सहित प्रदेश के कई अन्य जिलों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा जिला अक्षय ऊर्जा कार्यालय के पास भी योजना लागू करने का निर्देश आया है। विभाग अभी प्रारंभिक तैयारियों में जुटा है।

बीते फरवरी महीने में केन्द्र सरकार ने इस योजना की स्वीकृति दी थी। इसकी शुरुआत जुलाई महीने में करने की तैयारी है। रीवा जिला पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किया गया है। यहां पर पहले से ही अल्ट्रामेगा सोलर पॉवर प्लांट ७५० मेगावॉट क्षमता का स्थापित है। साथ ही सोलर पंपों के मामले में भी किसानों की अधिक रुचि रही है। इसलिए माना जा रहा है कि अन्य जिलों की तुलना में सोलर एनर्जी के प्रति रीवा के किसान अधिक जागरुक हैं।

दो मेगावॉट तक के लगेंगे प्लांट
सोलर पैनल से बिजली उत्पादन करने की तैयारी के बीच कहा गया है कि रीवा में दो मेगावॉट तक के सोलर प्लांट किसान लगा सकेंगे। आधा मेगावॉट की लागत दो करोड़ रुपए बताई गई है। जिले में पांच हजार सोलर पंप कुसुम योजना से जुडऩे वाले किसानों को मुफ्त में देने की तैयारी है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा शुरू की जा रही कुसुम योजना का लाभ बड़े किसान ही उठा पाएंगे। एक मेगावॉट का प्लांट लगाने में करीब दो हेक्टेयर भूमि की जरूरत होगी। इसकी लागत इतनी अधिक है कि छोटे किसान के लिए आर्थिक समस्या होगी। हालांकि सरकार ने सब्सिडी देने के साथ ही बैंक लोन कराने की भी तैयारी की है। इसमें 10 प्रतिशत हिस्सा ही किसान को चुकाना होगा। रीवा जैसे स्थान में जहां किसानों की स्थिति ठीक नहीं है, इस योजना को बड़े पैमाने में लागू करा पाना चुनौती होगी।

अल्ट्रामेगा सोलर प्लांट बना मॉडल
रीवा के बदवार पहाड़ में लगाए गए 750 मेगावॉट क्षमता के अल्ट्रामेंगा सोलर पॉवर प्लांट को केन्द्र सरकार ने मॉडल प्रोजेक्ट माना है। यहां पर जिस तरह से बंजर भूमि का उपयोग किया गया है। उसी तरह गैर कृषि उपयोगी किसानों की भूमि में सोलर पैनल लगाकर बिजली उत्पादन कराने की तैयारी की जा रही है। किसान बिजली स्वयं के उपयोग के साथ ही पॉवर ग्रिड के माध्यम से सरकार को भी बेंच सकेंगे।

– ऐसे होगा योजना में इंवेस्टमेंट
– केन्द्र सरकार 30 प्रतिशत की सब्सिडी देगी।
– राज्य सरकार की सब्सिडी का भी हिस्सा 30 प्रतिशत होगा।
– किसान को दस प्रतिशत राशि करनी होगी खर्च।
– बैंक लोन के रूप में मिलेगी 30 प्रतिशत की राशि।
– सोलर एनर्जी की दर तय करेगी सरकार।
– रीवा के अल्ट्रामेगा सोलर पॉवर प्लांट की बिजली 2.97 रुपए प्रति यूनिट है।

कुसुम योजना की शुरुआत की जा रही है, शासन से कुछ निर्देश आए हैं। इसमें किसान दो मेगावॉट क्षमता तक के सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन कर सकेंगे। बिजली किस दर से खरीदी जाएगी, यह भी तय नहीं हुआ है। शासन स्तर से तय होना है।
एसएस गौतम, जिला अक्षय ऊर्जा अधिकारी<

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