रीवा : गांवों को शहर में शामिल करने से पहले फायदे और नुकसान का होगा आकलन…

Rewa
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रीवा। शहर से लगे गांवों को नगरी निगम की सीमा में शामिल करने के लिए प्रक्रिया बीते जनवरी महीने से प्रारंभ की गई थी। चुनाव आचार संहिता के चलते इसकी प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगी है। दावा-आपत्तियों की सुनवाई से जुड़े सभी प्रकरण शासन ने भोपाल मंगा लिया है। इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसी बीच नगरीय प्रशासन विभाग ने एक और पत्र भेजा है, जिसमें कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त से ऐसी रिपोर्ट मांगी गई है, जिससे यह साबित हो सके कि संबंधित गांव को नगर निगम में शामिल करना किस वजह से जरूरी है। शहर के सीमा विस्तार के लिए २३ जनवरी को नगरीय प्रशासन विकास विभाग ने पत्र जारी कर कहा था कि १० फरवरी के पहले कलेक्टर को अधिसूचना प्रकाशन करना था लेकिन बाद में इसकी तिथि २८ फरवरी तक बढ़ा दी गई। रीवा में कलेक्टर ने १८ फरवरी को अधिसूचना जारी की थी। महीने भर का समय दावा-आपत्तियों पर सुनवाई के लिए दिया था। जिसमें १७ गांवों के सरपंचों के साथ ही अन्य कई संगठनों ने भी गांवों को शहर में शामिल करने का विरोध किया था। आसपास के किसी गांव की ओर से यह दावा नहीं पेश किया गया है कि उनके गांव को शहर में शामिल किया जाए। अब तक आपत्तियां ही आई हैं। चुनाव आचार संहिता का हवाला देकर इसकी प्रक्रिया को २९ मार्च को रोक दिया गया था। अब संबंधित गांवों को शहर में शामिल करने से जुड़ी जानकारी मांगी गई है।

– यह रिपोर्ट शासन ने मांगी
शहरी सीमा विस्तार की प्रक्रिया पर रोक के बाद शासन ने जो जानकारी मांगी है, उसे १८ अप्रेल के पहले भेजना है। इसमें यह बताना होगा कि शहर में शामिल और प्रस्तावित क्षेत्र की जनसंख्या, गांवों के जनसंख्या की सघनता, स्थानीय प्रशासन के लिए उत्पन्न राजस्व, कृषि से भिन्न क्रियाकलापों में नियोजन की प्रतिशतता, आर्थिक महत्व आदि के साथ यह भी बताना होगा कि किस गांव को शामिल करने से निगम को कितना अनुमानित राजस्व का फायदा होगा।

– पुराने वार्डों का विकास नहीं होने पर उठ रहे सवाल
शहर की सीमा विस्तार को लेकर जो आपत्तियां आई हैं उसमें अधिकांश में यह दावा किया गया है कि पहले से जिन गांवों को शहर में शामिल किया गया था, उनका अब तक विकास नहीं हो पाया है। कई वार्ड ऐसे हैं जहां अब भी सड़क, पानी, नाली, बिजली आदि की समस्या बनी हुई है। यही तर्क दिया जा रहा है कि पहले इन क्षेत्रों को विकसित किया जाए,इसके बाद ही सीमा विस्तारित की जाए।

– इन गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल करने का है प्रस्ताव
मास्टर प्लान की अनुशंशा पर नगर निगम में जिन गांवों को शामिल करने का नोटिफिकेशन जारी हुआ है। उसमें ४५ गांव हैं। जिसमें प्रमुख रूप से नीगा, रमकुई, गोड़हर, अमरैया, तुरकहा, दुआरी, करहिया, मैदानी , केमार, बिड़वा देवार्थ, अटरिया, मढ़ी, किटवरिया, अजगरहा, उमरिहा, सिरखिनी, बरा (395), बरा (393), इटौरा, भाटी , सोनौरा, पुरैना, बेलहा(451), बेलहा, कोष्टा, भुंडहा , गड़रिया, जिवला, सिलपरा, डकवार, सिलपरी, बैसा , मगुरहाई, रमपुरवा, रौसर , पिपरा(376), पिपरा (375), खोखम आदि गांवों को मास्टर प्लान में ही प्रस्ताव था लेकिन कलेक्टर ने छह नए गांवों में जोड़ा है, जिसमें लोही, खौर 147, हरिहरपुर, तिघरा, कोठी एवं अल्ला नगरी आदि शामिल हैं।

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