रीवा : चुरहट में पदस्थ डॉ. शिवम मिश्रा की मौत को लेकर आये नया मोड़, पढ़िये पूरी खबर

Rewa

सीधी. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चुरहट में पदस्थ डॉ. शिवम मिश्रा की मौत के गुत्थी महीने भर बाद भी नहीं सुलझ पाई। इसे लेकर पुलिस की विवेचना पर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं शुरुआती दौर में सडक़ पर उतरकर कैंडल मार्च करने वाले संगठनों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। माना जा रहा है कि शायद उन्हें भी इस घटना से कोई सरोकार नहीं रहा। पुलिस व मजिस्ट्रेटियल जांच की दिशा क्या है? जांच में लगा अमला भी बताने को तैयार नहीं है। संभवत: वे इंतजार कर रहे हैं कि समय गुजर जाए तो मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाय।
जानकारों का कहना है कि डॉ. शिवम मिश्रा का शव उनके सरकारी आवास में फंदे से लटकता मिला था। इसमें विभाग के बड़े अधिकारियों व स्टाफ नर्स की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे थे। उसने एससी-एसटी एक्ट का मामला पंजीबद्ध कराया था। आरोप है कि पुलिस व विभागीय अधिकारियों का लगातार दबाव बढऩे के कारण डॉ. मिश्रा को न्याय की उम्मीद कम थी। सवाल ये भी है कि आत्महत्या के लिए उन्होंने सुबह 10 बजे का समय ही क्यों चुना। इसे लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। इस मामले में डॉ. शिवम के परिजन भी शुरू में ही चल रही जांच को लेकर प्रश्रचिन्ह लगा चुके है। उनके द्वारा बड़े अधिकारियों से भी मामले की सक्षम जांच कराने की मांग की गई थी।

सीबीआई जांच की मांग
विभागीय अमले का भी मानना है कि सच्चाई तभी उजागर हो सकती है, जब इसकी जांच बड़ी एजेंसी को सौंपी जाए। सीबीआई जांच को लेकर प्रशासन को कई बार ज्ञापन भी सौंपा गया। लेकिन आश्वासन ही मिला। जिला स्तर से सीबीआई जांच की अनुशंसा न होने के कारण यह लगभग अनिश्चितता के घेरे में है। लोगों का मानना है कि जिला स्तर पर बड़े अधिकारियों के दबाव के चलते डॉ. शिवम मिश्रा के मौत के मामले की जांच सही तरीके से नही हो रही है। मजिस्ट्रेटियल जांच की जिम्मेदारी भी जिन्हे सौंपी गई थी। उनके द्वारा तत्परतापूर्वक अपनी जांच नही शुरू की गई। जिसके चलते मौके पर जो भी साक्ष्य मौजूद थे। उन्हे मिटाने के लिए इस षडयंत्र में शामिल लोगों को भरपूर समय जानबूझकर दिया गया है।

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