रीवा में बाघ का आतंक, छत में काटी रात, दहाड़ से दहशत में रहें रहवासी1 min read

Madhya Pradesh Rewa

रीवा। तेंदुआ के बाद अब रीवा में बाघ की इंट्री हुई है. बैसा गाँव में सुबह दिखे बाघ ने दहशत फैला दी है। गांव की छत पर रात काटने के बाद सुबह दहाड़ते हुए वह बाहर निकल गया। वन विभाग की टीम गांव तो पहुंची, लेकिन उन्हें सिर्फ पद्चिन्ह पर ही संतोष करना पड़ा। दिन भर बाघ की तलाश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।

शुक्रवार की सुबह बैसा गांव में आतंक का माहौल रहा। लोगों ने घरों का दरवाजा खोला तो सामने बाघ पाया। बच्चों की नजर सबसे पहले बाघ पर पड़ी। गांव के ही एक सज्जन के घर की छत पर बाघ धूप ताप रहा था। बच्चों ने हल्ला मचाया तो बड़े इकट्टा हुआ। भीड़ देखकर बाघ ने छत से कच्चे मकान पर छलांग लगाई और गांव के बीच पहुंच गया। बीच गांव में तीन दहाड़ मारी। डर का माहौल इतना था कि लोगों ने खुद को घरों में कैद कर लिया। हालांकि बाघ का पेट भरा हुआ था, तो उसने पास में बंधे भैसे तक को शिकार नहीं बनाया। कुछ देर गांव में रुकने के बाद वह खेत से होते हुए नदी का रास्ता पकड़ लिया।

गांव से बाघ के जाते ही लोगों ने राहत की सांस ली। वन विभाग को इसकी सूचना दी गई। बैसा गांव पहुंची टीम ने पद चिन्ह की जांच की। उसका पीछा किया। काफी दूर तक गए, लेकिन बाघ नहीं मिला। वन विभाग शाम तक गांव में मौजूद रहा, फिर खाली हाथ वापस लौट आया। बाघ को पकडऩे गई टीम में प्रमुख रूप से एसीएफ ओजी गोस्वामी, रेंजर केके पाण्डेय, ड्राटमैन रोहित पाण्डेय, फॉरेस्ट गार्ड अनिल कुशवाहा, दिलीप साकेत, आशुतोष पाण्डेय शामिल रहे। टीम के पास जाल, ट्रंकुलाइजर गन व अन्य उपकरण मौजूद थे। गोविंदगढ़ की तरफ से आने का अनुमान वन विभाग की टीम की मानें तो बाघ पन्ना टाइगर रिजर्व का है। वहां पन्ना से निकल कर रीवा के जंगलों से होता हुआ संजय टाइगर रिजर्व गया होगा। वहां से लौटते हुए गोविंदगढ़ के जंगल से बैसा गांव पहुंचा होगा। यदि उसका मूव्हमेंट इसी तरह रहा तो वह मैहर होते हुए वापस पन्ना पहुंच जाएगा।

युवा और कम उम्र का है बाघ
पद चिन्ह की नाप जोख करने के बाद वन विभाग का अनुमान है कि बाघ युवा और कम उम्र का है। बाघ के वजन के कारण उसके पंजे जमीन पर ज्यादा धंसे हुए हैं। गांव में पहुंचने पर भी उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया, इसका मतलब उसने कुछ दिन या घंटो पहले ही शिकार किया होगा। एक दहाड़ में ही दरवाजे हो गए थे बंद सुबह दो घंटे तक बाघ की चहल कदमी बनी रही।

बाघ की एक दहाड़, और मच गई भगदड़
बाघ ने एक दहाड़ या लगाई भाग दौड़ मच गई। लोग घरों में कैद हो गए। खिड़कियों से ही लोग बाघ की हरकत को देखते रहे। जब वह बाहर निकल गया, तब लोगों ने भी घरों का दरवाजा खोला। बाघ के पकड़े न जाने से हालांकि अब भी गांव के लोगों में डर बना हुआ है।

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