रीवा: करोड़ों का आसामी निकला ट्राइबल उपायुक्त, मिली 3 करोड़ की बेनामी संपत्ति

क्राइम मध्यप्रदेश रीवा

रीवा। लोकायुक्त पुलिस जबलपुर व लोकायुक्त रीवा पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शनिवार को आदिवासी विकास विभाग मंडला के उपायुत के ठिकानों पर एक साथ छापामार कार्रवाई की। कार्रवाई में तीन करोड़ से अधिक की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त जबलपुर की एक टीम ने मंडला स्थित सरकारी आवास, भोपाल, इंदौर व दो टीमें आरोपी उपायुक्त के गृह जिला रीवा में शांति विहार कॉलोनी पडऱा व गृहग्राम पुरवा में एक साथ कार्रवाई की।

जानकारी के अनुसार रीवा के सेमरिया तहसील के ग्राम पुरवा (बसामन मामा) निवासी संतोष शुल मंडला में आदिवासी विकास विभाग में उपायुक्त पद पर पदस्थ हैं। लोकायुक्त से शिकायत की गई थी कि उपायुक्त संतोष शुल द्वारा विभागीय योजनाओं में भ्रष्टाचार कर करोड़ों की बेनामी संपाि अर्जित की गई है। शिकायत पर लोकायुक्त पुलिस ने प्राथमिक जांच की तो शिकायत सही पाई गई। आय से अधिक संपाि का साक्ष्य मिलने पर लोकायुक्त जबलपुर एसपी अनिल विश्वकर्मा ने तीन टीमें गठित कर शनिवार अलसुबह एक साथ छापामार कार्रवाई की। सुबह से देर शाम की गई जांच कार्रवाई में शुल के गृह जिले में तीन करोड़ से अधिक की संपाि मिली है। शांति विहार कॉलोनी में जमीनें लोकायुत पुलिस की जांच में सामने आया कि रीवा शहर के शांति विहार कॉलोनी में ही एक करोड़ से अधिक का आवास एवं प्लॉट है। इसी तरह गांव में कई एकड़ जमीनें खरीदने के प्रमाण मिले हैं।

आरोपी उपायुक्त के पास सोना-चांदी के जेवर, बैंक लॉकर व बैंकों में जमा राशि का हिसाब-किताब चल रहा है। केवल रीवा में जमीन प्लॉट, आवास की कीमत तीन करोड़ से अधिक पहुंच गई है। जांच में यह बात सामने आई है कि शुल ने नौकरी दौरान शासन से प्राप्त वेतनमान से कई गुना अधिक की संपाि अर्जित की है। अधिकांश संपत्तियां पत्नी और अपने नाम से खरीदी गई हैं। देर रात तक कार्रवाई जारी रही। रीवा के एसपी लोकायुत डॉ, संजीव सिंहा ने कहा, यह कार्रवाई जबलपुर लोकायुक्त की है। हमने केवल सहयोग किया है। साा में गहरी पैठ लोकायुक्त की छापामार कार्रवाई के बाद चर्चा में जो बातें सामने आई हैं, उसमें आरोपी उपायुक्त संतोष शुला की साा में गहरी पैठ बताई जा रही है।

बताया गया है कि उनका भाई अशोक शुला रीवा जिले के सेमरिया संकुल में सहायक अध्यापक के पद पर पदस्थ हैं। वे हमेशा कलेट्रेट कार्यालय में अटैच रहे। कोर्ट और लोक शिक्षा संचालनालय के आदेश निर्देश के बावजूद भी उन्हें कलेट्रेट से नहीं हटाया गया। चर्चा यह भी है कि जो कोई भी अधिकारी आता है, उसे ऊपर से मैसेज आ जाता है।