मध्यप्रदेश में 9 साल की बच्ची के दुष्कर्मी को फांसी की सजा, 46 दिन में आया फैसला

मध्यप्रदेश में 9 साल की बच्ची के दुष्कर्मी को फांसी की सजा, 46 दिन में आया फैसला

क्राइम मध्यप्रदेश सागर

सागर/रहली। 9 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के आरोपित 40 वर्षीय व्यक्ति को शनिवार को रहली कोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई। जिले का यह पहला मामला है, जिसमें मात्र 46 दिनों में बड़ा फैसला आया है। इससे पहले खुरई में 19 जून को आए फैसले में नाबालिग से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है।

ये था मामला

21 मई 2018 को रहली थाना के तहत 9 वर्षीय बालिका को धर्मस्थल में ले जाकर दुराचार करने का मामला सामने आया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 40 वर्षीय आरोपित भग्गी उर्फ भगीरथ पटेल को गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी राम अवतार चौराहा ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कराने आई पीड़िता की मां ने बताया था कि 21 मई को भग्गी उर्फ नारायण उर्फ भगीरथ पटेल (40) निवासी खमरिया ने एक धर्मस्थल में ले जाकर बच्ची से दुराचार किया। बच्ची के चीखने की आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों को देखकर आरोपित वहां से भाग गया था। आरोपित भागीरथ पटेल के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला पंजीबद्ध किया था।

मामले की गंभीरता के आधार पर विवेचना अधिकारी ने इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में रखा। विवेचना एसडीओपी बीपी समाधिया के निर्देशन में थाना प्रभारी रामअवतार चौराहा ने 72 घंटे में पूरी कर 24 मई 2018 को न्यायालय में चालान पेश किया। इस प्रकरण की पैरवी अपर लोक अभियोजन अधिकारी पीएल रावत ने की। न्यायालय से ट्रायल के 46वें दिन आरोपित भग्गी उर्फ भगीरथ उर्फ नारायण पटेल को फांसी की सजा सुनाई।

डेढ़ माह में सजा का जिले में पहला मामला

एडीजे सुधांशु सक्सेना ने मामले का फैसला सुनाते हुए आरोपित को फांसी की सजा सुनाई। सजा सुनाने के बाद आरोपित भग्गी उर्फ भगीरथ उर्फ नारायण पटेल को रहली जेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिले का यह पहला मामला है, जिसमें दुष्कर्म करने वाले आरोपित को करीब डेढ़ माह में ही साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है।

खुरई कोर्ट भी सुना चुका है फांसी की सजा

जिले के खुरई न्यायालय ने भी ऐसे ही मामले में 19 जून 2018 को सुनाए अपने फैसले में दोषी को फांसी की सजा मुकर्रर की है। खुरई के उजनेट में 13 अप्रैल 2017 को 43 वर्षीय आरोपित सुनील आदिवासी ने 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी। करीब सवा साल तक चले केस के बाद द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सुमन श्रीवास्तव ने इसे विरल से विरलतम मामला करार देते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई।