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केन्द्र के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार की बड़ी चेतावनी! 'जरूर आएगी कोरोना की तीसरी लहर, इसे टाला नहीं जा सकता है'

RewaRiyasat.Com
रीवा रियासत डिजिटल
05 May 2021

COVID-19 के दूसरी लहर का पीक आना बाकी, अब तीसरी लहर की आशंका ने बढ़ा दी टेंशन, महामारी से निपटने हो रही तैयारी

केन्द्र सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकर ने बुधवार को तीसरी लहर की चेतावनी देते हुए कहा कि यह जरूर आएगी

Third Wave of COVID-19 / दुनियाभर के अधिकांश देश इन दिनों कोरोना महामारी की दूसरी लहर (Second Wave of COVID-19) से जूझ रहें हैं. दूसरी लहर काफी खतरनाक है. रोजाना तीन से चार हजार लोगों की मौतें हो रहीं हैं, जबकि इसका पीक अभी आना बांकी है. इधर, केंद्र के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकारों ने बुधवार को बड़ी चेतावनी जारी की है. उनका दावा है कि कोरोना की तीसरी लहर जरूर आएगी, इसे किसी भी स्थिति में टाला नहीं जा सकता है. 

कोरोना की तीसरी लहर की चेतावनी

केन्द्र सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकर विजय राघवन ने कहा कि वायरस संक्रमण के काफी मामले आ रहे हैं, इसलिए यह इस वक्त नहीं कहा जा सकता है कि कोरोना की तीसरी लहर कब आएगी. लेकिन यह अवश्य आएगी इसलिए हमें नई लहर के लिए तैयारी कर देनी चाहिए.

स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर को नहीं टाला जा सकता है. उन्होंने कहा कि वैक्सीन को अपडेट करने की आवश्यकता पड़ेगी ताकि इस नए कोरोना स्ट्रेन से मुकाबला किया जा सके. उन्होंने उम्मीद जताई कि हमें नए लहर की तैयार कर देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि वैक्सीन अपग्रेड करने के साथ ही सर्विलांस की भी आवश्यकता होगी.

अब बड़ा सवाल यह भी है कि कहीं तीसरी लहर दूसरे से अधिक खतरनाक तो नहीं? और इससे निपटने के लिए भारत कितना तैयार है. क्योंकि दूसरी लहर में सबसे अधिक प्रभावित देशों में भारत भी शामिल है.

हांलाकि भारत की ओर से इससे निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है. वैक्सीनेशन में तेजी लाई गई है, पर क्या इतनी अधिक जनसँख्या वाला देश इतनी जल्द अपनी तीसरी लहर को फेस करने के लिए तैयार हो पाएगा, यह भी एक सवाल है. दूसरी लहर का पीक मई माह के दूसरे सप्ताह से आना अभी बांकी है, इस बीच तीसरी लहर से निपटने की भी तैयारी शुरू कर दी गई है. 

तीसरी लहर को रोकने के उपायों में जुट गए दुनियाभर के वैज्ञानिक 

सीएसआइआर के महानिदेशक डाॅक्टर शेखर मांडे के मुताबिक तीसरी लहर की आशंका साफ़ बन रही है. दुनियाभर के वैज्ञानिक इससे चिंतित हैं और इसे रोकने के उपायों को खोजने में जुट गए हैं. 

वैसे डा.मांडे यह भी मानते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर को स्पेनिश फ्लू की तीसरी लहर जैसी खतरनाक होने से बचा जा सकता है. कोरोना के खिलाफ वैक्सीन एक कारगर हथियार है और वह हमारे पास है.

बचाव के ये रास्ते 

डॉ. मांडे के मुताबिक़ वैक्सीन लगाने के काम में तेजी लानी होगी. जिस पर काम भी तेजी से चल रहें हैं. पूरी दुनिया वैक्सीनेशन के काम में जुटी हुई है. डाॅ. शेखर मांडे का मानना है कि अक्टूबर तक 15-20 फीसद लोगों को वैक्सीन के दोनों डोज लग जाएंगे, जबकि 63 फीसद लोगों को सिंगल डोज ही लग पाएगा. 

एसबीआइ की ताजा इकोरैप रिपोर्ट भी डाॅ. शेखर मांडे के दावे का समर्थन करती है. इस रिपोर्ट में दुनिया के विभिन्न देशों में टीकाकरण के अनुभवों के आधार पर दावा किया गया है कि किसी भी देश में 15-20 फीसद जनसंख्या को दोनों डोज लग जाने के बाद संक्रमण की रफ्तार स्थिर हो जाती है.

70 फीसद आबादी सुरक्षित हो जाएगी 

भारत में वैक्सीन के उत्पादन की मौजूदा स्थिति और भविष्य की तैयारियों के आधार पर एसबीआइ ने अक्टूबर तक देश में लगभग 105 करोड़ डोज उपलब्ध होने का दावा किया है. इतने डोज से भारत की 15 फीसद जनसंख्या को दोनों डोज और 63 फीसद को पहला डोज लग चुका होगा. यानी करीब 70 फीसद आबादी को सुरक्षित हो चुकी होगी.

30 फीसद लोगों को दोनों डोज सुनिश्चित करना होगा

विशेषज्ञों का मानना है की तीसरी लहर आने के पहले देश भर के 30 फीसदी लोगों को दोनों डोज लगाने होंगे. नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप आन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फार कोविड-19 (नेगवैक) के सदस्य डाॅक्टर एनके अरोड़ा के अनुसार कोरोना की पहली लहर का पीक सितंबर में आया था. फिर चार महीने तक धीरे-धीरे मामले घटते गए. दूसरी लहर की शुरुआत फरवरी में शुरू होकर मई में पीक तक पहुंचने के आसार हैं.

हर पीक के बाद चार माह कम होता रहेगा कोरोना का प्रकोप 

मई में पीक के बाद अगले चार महीने तक कोरोना का प्रकोप कम होता रहेगा और उसके बाद ही तीसरी लहर की शुरुआत होगी. तीसरी लहर का पीक आने में दो-तीन महीने का समय लगेगा. इस तरह अक्टूबर या नवंबर तक तीसरे चरण की शुरुआत होगी.

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