PK: वो चुनावी चाणक्य जिसने UN की नौकरी छोड़, मोदी से लेकर नीतीश को जीत दिलाने में निभाई अहम भूमिका1 min read

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चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी चुनावी राजनीति की पारी की शुरूआत जनता दल यूनाइटेड से करने का फैसला लिया है. पिछले 7 साल से विभिन्न राजनीतिक दलों के रणनीतिकार के तौर पर किशोर की मौजूदगी को किसी भी पार्टी के लिए जीत की गारंटी के तौर पर देखा जाता रहा है.

UN की नौकरी छोड़ मोदी के साथ जु़ड़े

भारत में चुनावी रणनीतिकार के तौर पर करियर की शुरुआत करने से पहले प्रशांत किशोर संयुक्त राष्ट्र के सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े अभियान में नौकरी करते थे. 34 साल की उम्र में अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र की नौकरी छोड़ कर किशोर 2011 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की टीम में शामिल हुए और 2012 के विधानसभा चुनाव में मोदी की पॉलिटिकल ब्रांडिंग का कार्य शुरू किया. जिसके बाद किशोर ने 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के अभियान को मोदी लहर में तब्दील करने में अहम भूमिका निभाई.

बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है!

लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से प्रशांत किशोर की मतभेद की खबरों के बीच उन्होंने जेडीयू का दामन थामा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निवास पर रहते हुए 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाई. नीतीश कुमार के जनसंपर्क अभियान ‘हर-घर दस्तक’ और ‘बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है’ जैसे लोकप्रिय नारे के पीछे किशोर ही थे. ऐसा माना जाता है कि एक दूसरे के धुर विरोधी जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस का महागठबंधन बनवाने में उनकी अहम भूमिका रही. इस चुनाव में बीजेपी को तगड़ी हार का सामना करना पड़ा. सरकार गठन के बाद नीतीश सरकार के परामर्शी और बिहार विकास मिशन के शासी निकाय के सदस्य के तौर पर प्रशांत किशोर को मंत्री का दर्जा प्राप्त था.

बहरहाल प्रशांत किशोर को यह भूमिका रास नहीं आई नीतीश सरकार के गठन के बाद उन्होंने अपनी भूमिका मुख्यमंत्री आवास से बाहर ज्यादा मुनासिब समझी. लिहाजा बिहार विकास मिशन के शासी निकाय के सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के प्रचार अभियान का काम किया, जिससे कि जगनमोहन रेड्डी की आंध्र प्रदेश की सत्ता हासिल करने की संभावनाओं को मजबूत बनाया जा सके.

कांग्रेस के साथ असफल रहा प्रयोग

इसके साथ प्रशांत किशोर 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी के पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान से जुड़ें. कैप्टन अमरिंदर सिंह के ‘कॉफी विद कैप्टन’ और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (तब उपाध्यक्ष थे) की किसान यात्रा और ‘खाट सभा’ की रूप रेखा भी तैयार की. किशोर के किसी भी दल के साथ काम करने की पहली शर्त यह होती है कि वे उस नेता के घर से ही अपने दफ्तर का संचालन करते हैं. लेकिन कांग्रेस में यह संभव न हो सका प्रशांत किशोर की कांग्रेस की रणनीति में दखल कई कांग्रेसी पचा नहीं पाए और खुले तौर पर इसकी मुखालफत की.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए संभावनाएं मजबूत करने की कोशिश में रणनीतिकार के तौर पर किशोर नाकाम रहे. हालांकि किशोर से जुड़े सूत्र यूपी में कांग्रेस की दुर्दशा के लिए ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नेतृत्व को ही जिम्मेदार ठहराते हैं.

किशोर के एक सहयोगी का कहना है, ‘अगर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को यूपी में मुख्यमंत्री के लिए अपने चेहरे के तौर पर पेश करने की सलाह को मान लिया होता तो मुस्लिम एकमुश्त कांग्रेस की ओर लौट सकते थे और वो चुनाव जीत सकते थे.’

2014 में CAG और 2019 में NAF के जरिए युवाओं को जोड़ने की कवायद

प्रशांत किशोर ने साल 2013 में सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (CAG) के जरिए प्रधानमंत्री मोदी के साथ युवा प्रोफेशनल्स को जोड़ने का व्यापक अभियान चलाया. इस टीम में आईआईटी, आईआईएम और दिल्ली विश्वविद्यालय से युवा काफी संख्या में जुड़ें. जब भाजपा की सरकार बनी तो इन युवाओं को सरकार के साथ जोड़ने की रणनीति बनी ताकि इनका पुनर्वास किया जा सके. इसी टीम के प्रोफेशनल्स को किसी मंत्री के साथ, कुछ को नीति आयोग तो कुछ लोगों को पार्टी और उससे जुड़े थिंक टैंक से जोड़ा गया. एक बड़ा समूह भाजपा महासचिव राम माधव और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के बेटे शौर्य डोवाल के थिंक टैंक इंडिया फाउंडेशन से जुड़ा.

2019 के चुनावी एजेंडा तैयार करने के लिए प्रशांत किशोर की संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) ने जुलाई में नेशनल एजेंडा फोरम (NAF) लांच किया जिसके माध्यम से हाल ही में देश के प्रधानमंत्री के तौर पर चेहरों को लेकर सर्वेक्षण कराया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से तीन गुनी ज्यादा होने का दावा किया गया.

I-PAC, ने इस बीच युवाओं की भर्ती करना शुरू कर दिया है. इसका हैशटैग #NationalAgendaForum हर ट्वीट के साथ जोड़ा जा रहा है जो कहता है- ‘वोट देने की शक्ति लोकतंत्र के इंजन को ऊर्जा देती है. अभी वोट दें और 2019 का अपना एजेंडा सेट करें.’

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