वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखना पड़ेगा महंगा, जानिए मामला...

वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखना पड़ेगा महंगा, जानिए मामला…

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय

वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखना पड़ेगा महंगा, जानिए मामला…

नई दिल्ली। गाड़ियों में जातिसूचक शब्द लिखने का चलन काफी बढ़ चुका है। इसे लोग अपना तजुर्बा समझ रहे हैं। लेकिन अब इस तरह की शौक पालने वालों सरकार ने कड़ी कार्रवाई का मन बना लिया है। जानकारी मिली है कि उत्तरप्रदेश में अब गाड़ियों पर जाति सूचक शब्द, ब्राम्हण, क्षत्रिय, गुर्जर, यादव, खान, राजपूत, जाति जैसे शब्द लिखवाने वालों पर सरकार ने कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

इस तरह का मामला उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में सामने आ चुका है जहां थाना नाका पुलिस ने जातिसूचक शब्द लिखने पर कानपुर के बिल्हौर निवासी आशीष सक्सेना की कार का चालान कर दिया। इन्होंने कार के पीछे सक्सेना लिखा रखा था। ज्ञात हो कि उक्त कार्रवाई पीएमओ के निर्देश के बाद यूपी सरकार ने गाड़ियों पर जातिसूचक शब्द का स्टीकर लगाने वालों प्रतिबंध लगाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है।

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वाहन सीज करने की होगी कार्रवाई

बताया गया कि वाहनों में जाति सूचक शब्द लिखा होने पर धारा 177 के तहत चालान या फिर वाहन को सीज करने की कार्रवाई की जाएगी। बताया गया है कि राजधानी लखनऊ में 2 पहिया और 4 पहिया मिलाकर कुल 25 लाख गाड़िया हैं। कहा गया है कि यदि कोई ऐसे जातिसूचक शब्द लिखा रखा है तो उसे हटा दें अन्यथा प्रशासन आपके खिलाफ कार्यवाही कर सकता है।

वाहनों पर जातिसूचक शब्द लिखना पड़ेगा महंगा, जानिए मामला...

जातिसूचक शब्द लिखाने का बढ़ा शौक

बताया गया है कि केंद्र सरकार को लगातार ऐसी शिकायतें मिलती रही थीं कि गाड़ियों में जाति सूचक शब्द लिखाना लोग अपना तजुर्बा समझते हैं। इसका प्रचलन वर्तमान में चल निकला है। यह माना जा रहा है कि दूसरी जातियों को नीचा दिखाने के लिए इस तरह के शब्दों का प्रयोग लोग कर रहे हैं। इसी को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय ने पत्र जारी कर जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश दिये हैं।

देशभर में जाति सूचक शब्द पर कार्यवाही की जरूरत

जातिसूचक शब्द लिखने का क्रेज लगभग देश भर में चल रहा है। जिस पर देश की राज्य सरकारों को कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। हालांकि कई राज्यों में पूर्व में प्रतिबंध लगाया जा चुका है लेकिन कड़ी कार्रवाई न होने के कारण इस पर रोक नहीं लग पा रही है।

यदि राज्य सरकारें जातिसूचक शब्द लिखने वालों पर ठोस कार्रवाई शुरू कर दें तो अच्छा परिणाम आ सकता है। लोग सहज और सरल रहने का अभ्यास शुरू करेंगे। किसी को ऊंचा और नीचा दिखाने की परम्परा बदल जाएगी। जिससे सभी को समानता का अनुभव होगा।

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