यह शिव मंदिर दिन में दो बार ले लेता है जलसमाधि और हो जाता है समुद्र में गायब !1 min read

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आपने कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिरों के बारे में सुना होगा पर ये मदिर सबसे अनोखा है। भारत में अनेक प्राचीन मंदिर है जो अपनी खासियतों के लिए दुनिया भर में विख्यात है और इसी वजह से आज भी हमारे देश में आस्था कायम है। आज हम आपको बताने वाले है एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में जो दिन में दो बार समुद्र में डूब जाता है और फिर प्रकट हो जाता है।

जी हाँ अगर हैरान हो गए है तो आपको विस्तार से बताते इस मंदिर का ये चमत्कार। यह मंदिर स्तंभेश्वर महादेव के रूप में जाना जाता है और गुजरात के कच्छ में स्तिथ है। यह शिव मंदिर समुद्र की लहरों में अपने आप गायब हो जाता है और कुछ देर बाद फिर से बाहर आ जाता है लेकिन ख़ास बात है की ऐसा रोजाना सिर्फ दो बार होता है न ही कम न ज्यादा।

देश विदेश के लाखों सैलानी इस शिव मंदिर के दर्शन को आते है। गुजरात के स्तंभेश्वर मंदिर का उल्लेख महाशिवपुराण में रूद्र संहिता भाग-2 के अध्याय 11 में किया गया है।

इस मंदिर की खोज आज से लगभग 150 साल पहले हुई थी। यह मंदिर बड़ोदरा से 40 मील की दूरी पर अरब सागर के कैम्बे तट पर स्थित है। शिव मंदिर में स्थापित शिवलिंग लगभग 4 फ़ीट ऊंचा और 2 फ़ीट के व्यास का है।

इस मंदिर में शिवलिंग का दर्शन दिन में केवल एक बार होता है इसके बाद समुंद्र में आने वाले ज्वारभाटे के कारण ये मंदिर समुन्दर में समां जाता है। ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह जलमग्न हो जाता है और उस समय वहां किसी को भी जाने की अनुमति नहीं होती।

इस शिव मंदिर के इतिहास को लेकर कई पौराणिक कथाएं है जिनमे इस बात का उल्लेख किया गया है की इस मंदिर का निर्माण खुद शिव जी के पुत्र कार्तिकेय ने किया है।

कहा जाता है की कार्तिकेय द्वारा शिव के बड़े भक्त का वध हो जाता है और इसी गलती की क्षमा मांगने के लिए उन्होंने इस शिव मंदिर का निर्माण किया था।

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