बड़ी खबर : शादी के लिए लड़कों की उम्र 21 से घटाकर कर दी गई इतनी, पढ़िये

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नई दिल्ली.  विधि आयोग ने शादी के लिए लड़कों की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 साल करने का सुझाव दिया है। इसके लिए लड़कियों की उम्र पहले ही 18 साल तय है। आयोग ने कहा कि शादी में उम्र का अंतर दूर होना चाहिए। अगर इस उम्र में उन्हें सरकार चुनने का अधिकार है तो अपने लिए पति या पत्नी के चयन में भी सक्षम माना जाए। यह भी कहा कि शादी के बाद अर्जित की गई संपत्ति में पत्नी भागीदार है। तलाक होने पर उसे बराबर हिस्सा मिलना चाहिए।

परिवार कानून में सुधार के लिए तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि कानून में पति-पत्नी की उम्र में अंतर का कोई आधार नहीं है। इंडियन मेजॉरिटी एक्ट, 1875 के तहत लड़का-लड़की की उम्र 18 होनी चाहिए। अभी लड़कों की न्यूनतम उम्र 21 और लड़कियों की 18 होने से ऐसी रूढ़िवादी परंपरा बन गई है कि पत्नी की उम्र पति से कम होनी चाहिए।

परिवार में महिलाओं की भागीदारी अहम : आयोग ने सुझाव में कहा कि शादी के बाद पति ने जो भी संपत्ति अर्जित की उसे एक ईकाई माना जाए। इसमें दोनों की भागीदारी है। तलाक होने पर संपत्ति में पत्नी को बराबर हिस्सा मिलना चाहिए। फिलहाल, संबंध खत्म होने पर बराबर बंटवारा नहीं होने से एक पार्टी पर अनुचित बोझ आ जाता है। परिवार के लिए महिला अपने करियर तक से समझौता कर लेती है। घर के ज्यादातर कामों में हाथ बंटाती हैं, बच्चों का ध्यान रखती है। इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया। इसके लिए पर्सनल और सेक्युलर लॉ में संशोधन होना चाहिए।

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