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कोरोना ने ले ली नौकरी तो न हो परेशान, तीन महीने तक आधी सैलरी देगी सरकार, ऐसे करें आवेदन

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कोरोना ने ले ली नौकरी तो न हो परेशान, तीन महीने तक आधी सैलरी देगी सरकार, ऐसे करें आवेदन

कोरोना काल में कम ही लोग होंगे जिनकी नौकरी बची हुई है. कोरोना महामारी ने कई लोगो को अपना शिकार बना डाला। सरकार कोरोना से बचाने के रोकथाम में लगी है लेकिन एक समस्या सरकार के सामने और खड़ी हो जाती है. वो है नौकरी की. 

अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना के तहत ईएसआईसी सब्सक्राइबर्स को बढ़े हुए बरोजगारी भत्ते का लाभ मिलेगा। साथ ही पात्रता मामदंडों में भी राहत दी गई है। यह कदम योजना के अंदर नामांकित उन कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो लॉकडाउन के दौरान अपनी नौकरी खो चुके हैं। ऐसे लोगों को अब तीन महीने तक सैलरी की 50 फीसद राशि प्रदान की जाएगी। यह फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनकी इस साल 24 मार्च से 31 दिसंबर के बीच नौकरी चली गई होगी।

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ऐसे उठा सकेंगे फायदा
ESIC के मुताबिक बेरोजगार कामगार किसी भी ईएसआईसी शाखा में जाकर सीधे भी आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के बाद ईएसआईसी उसके द्वारा दिए गए दस्तावेजों को सत्यापित करेगा और फिर सबकुछ सही पाए जाने पर कामगार के बैंकक खाते में सीधे रकम ट्रांसफर कर दिया जाएगा। इसके लिए आधार नंबर की भी सहायता ली जाएगी।

ESIC के सदस्य बनने के 5 फायदे
1. बीमित व्यक्ति और उसके परिवार के सदस्यों को उस दिन से पूरी चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाती है जिस दिन से उसकी इंश्‍योयर्ड नौकरी शुरू हो जाती है। बीमित व्यक्ति या उसके परिवार के सदस्य के इलाज पर खर्च की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं है।

2. 1 साल में अधिकतम 91 दिनों के लिए प्रमाणित बीमारी की अवधि के दौरान बीमित कर्मचारी को 70 प्रतिशत की दर से नकद मुआवजे के रूप में दिए जाने का प्रावधान है।

3. गर्भावस्था के लिए मातृत्व लाभ 26 सप्ताह के लिए देय है। इसे किसी मेडिकल सलाह पर एक महीने की अवधि के लिए और बढ़ाया जा सकता है और इस दौरान पूरा वेतन भी दिया जाएगा।

4. कर्मचारी के बीमित रोजगार में प्रवेश करने की दिनांक से जब तक अशक्‍तता बनी है, तब तक 90 प्रतिशत की दर से उसे वेतन का भुगतान किया जाता है।

5. मृतक बीमित व्यक्ति के आश्रितों को मासिक भुगतान के रूप में वेतन के 90 प्रतिशत की दर से भुगतान किया जाता है। लेकिन इसमें यह देखा जाता है कि क्‍या कर्मचारी की मृत्‍यु ऑन ड्यूटी आई किसी चोट के चलते हुई या कार्यालयीन खतरों के कारण मौत हुई।

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