सरकारी बाबुओं का प्राइवेट सेक्टर में डेप्युटेशन? मोदी सरकार कर रही विचार

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प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की जॉइंट सेक्रटरी के पद पर नियुक्ति की अधिसूचना जारी करने के बाद सरकार उस प्रस्ताव पर भी गंभीरता से विचार कर रही है जिसमें कहा गया था कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को प्राइवेट कंपनियों में भी डेप्युटेशन पर भेजा जा सकता है। प्रस्ताव है कि इन्हें अलग-अलग कंपनियों में डेप्युटेशन पर भेजा जाए ताकि वे उनके कामकाज से भी वाकिफ हों और नई नीति बनाने या दूसरे कामकाज में वहां मिले अनुभवों का लाभ मिले।

यह प्रस्ताव संसदीय समिति की ओर से दिया गया है। हाल ही में नीति आयोग ने भी इसी तरह की रिपोर्ट दी थी। अब डीओपीट इस प्रस्ताव पर अमल के लिए एक कमिटी का गठन कर रही है जो इसके लिए रोडमैप तय करेगी। कमिटी को तीन महीने में रिपोर्ट देने को कहा जा सकता है।

उधर लैटरल एंट्री पर बोल्ड फैसला लेने के बाद मोदी सरकार इसके अमल में बहुत आक्रामक रुख नहीं दिखाएगी और तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अगला कदम उठाएगी। सूत्रों ने कहा कि अभी इन पदों पर नियुक्ति के परिणाम को देखने के बाद ही आगे की रणनीति तय होगी। विपक्ष की ओर से इसे मुद्दा बनाने के संकेत मिलने के बाद सरकार ने सतर्क रुख अपनाया है। एक सीनियर अधिकारी के अनुसार इस मामले में कई पेचीदा मसले भी हैं जिसे सरकार को आगे सुलझाना है।

लैटरल एंट्री के बहाने विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। कांग्रेस सहित कई दलों ने मोदी सरकार की इस कोशिश को अपने लोगों को ब्यूरोक्रेसी में जगह देने का आरोप लगाया। वहीं डीओपीटी सूत्रों के अनुसार सरकार की चिंता आरोपों से अधिक दूसरे दो मुद्दों पर अधिक है। सूत्रों के अनुसार डीओपीटी के प्रस्ताव पर शुरू में अधिकारियों ने चिंता जताई थी। लेकिन बाद में पीएम के निर्देश पर अधिकारियों की कमिटी बनाई तब इस पर सहमति बनी। लैटरल एंट्री में आरक्षण का विकल्प नहीं है।

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