Fact Check : पीएम मोदी ने माँ नर्मदा को रीवा की पहचान बताया था, क्या वाकई इनका आपस में कोई सम्बन्ध है ? यहाँ जानिए क्या है सच…

मध्यप्रदेश राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय रीवा

नई दिल्ली. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जुलाई को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से रीवा अल्ट्रा मेगा सौर ऊर्जा परियोजना (Rewa Ultra Mega Solar Energy Project) का लोकार्पण किया था. इस पर दावा किया जा रहा है की पीएम ने रीवा की गलत पहचान बताई. 

दावा के अनुसार उन्होंने कहा था कि ‘आज रीवा ने वाकई इतिहास रच दिया है. रीवा की पहचान मां नर्मदा के नाम से और सफेद बाघ से रही है. अब इसमें एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट का नाम भी जुड़ गया है.’ ऐसा ही एक ट्वीट पीएम के ट्विटर हैंडल से हुआ है. 

इस पर विपक्ष दलों ने पीएम पर निशाना साधना शुरू कर दिया. कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने उनके ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘असत्याग्राही’ बता दिया. साथ ही इसी ट्वीट में मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भी प्रतिक्रया दी है. 

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पीसी शर्मा ने कहा है की 

Fact Check 

पीएम के ट्वीट पर जो प्रतिक्रियाएं आ रही है क्या वे सही है? क्या वाकई रीवा और माँ नर्मदा का कोई कनेक्शन है. इस पर RewaRiyasat.Com एवं AjeebLog.Com द्वारा एक बार फिर से पीएम के बयान को सुना गया, उनके ट्वीट को दोबारा देखा गया. 

पीएम के भाषण को सुनने पर पता चलता है कि उन्होंने ऐसा कहा ही नहीं कि नर्मदा नदी रीवा में बहती है. उन्होंने कहा – कि रीवा की पहचान अब तक नर्मदा नदी और सफेद शेरों से थी. लेकिन, अब इसे एशिया के सबसे बड़े सोलर पॉवर प्रोजेक्ट के नाम से भी जाना जाएगा. यानी सारा विवाद रीवा के नर्मदा कनेक्शन को लेकर है

रीवा शहर का नर्मदा से कोई कनेक्शन है या नहीं. ये जानने के लिए हमने रीवा शहर के प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट चेक की. यहां रीवा के इतिहास से जुड़ी जानकारी भी दी गई है.

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रीवा की आधिकारिक वेबसाइट www.rewa.nic.in/इतिहास/ पर स्पष्ट लिखा है कि, नर्मदा नदी का पौराणिक नाम रेवा माना जाता है. रीवा का नाम इसी नदी के नाम पर है.

वेबसाइट पर दी गई जानकारी के प्रमुख हिस्से का हिंदी अनुवाद है : यह बघेल वंश के शासकों की राजधानी होने के साथ-साथ विंध्य प्रदेश की राजधानी भी रही है. ऐतिहासिक क्षेत्र रीवा को दुनिया में सफेद शेरों की भूमि के रूप में जाना जाता है. रीवा का नाम रेवा नदी के नाम पर रखा गया था, जिसे नर्मदा नदी का पौराणिक नाम कहा जाता है.

रीवा के इतिहास से जुड़ी अधिकृत जानकारी से ये स्पष्ट होता है कि ‘ नर्मदा नदी से रीवा का कनेक्शन जोड़ा जाना’ गलत नहीं है.

निष्कर्ष

न ही प्रधानमन्त्री का बयान गलत था, और न ही उन्होंने रीवा और नर्मदा नदी के कनेक्शन पर कोई तथ्यात्मक गलती की है. रीवा (रेवा) का नाम ही माँ नर्मदा नदी के नाम पर पड़ा था, इसलिए पीएम मोदी का यह कथन कि ‘रीवा की पहचान मां नर्मदा के नाम से और सफेद बाघ से रही है‘ सही पाया जाता है. 

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