‘दंगाइयों को पाताल से भी ढूंढ निकालेगी पुलिस’ : दिल्ली दंगे पर गृह मंत्री अमित शाह बोलें

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय

नई दिल्‍ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को दिल्‍ली हिंसा के मसले पर राज्‍य सभा में सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष के सवालों का सिलसिलेवार जवाब दिया। उन्‍होंने सदन में बताया कि दिल्ली हिंसा में अब तक 700 से ज्यादा FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस द्वारा बरामद हथियारों में देशी और ऑटोमैटिक दोनों ही शामिल हैं। आरोपियों की धरपकड़ के लिए 40 से ज्यादा टीमें बनाई गई हैं। केंद्रीय गृहमंत्री ने एकबार फ‍िर सदन में दोहराया कि दिल्‍ली हिंसा में शामिल किसी भी उपद्रवी को बख्‍शा नहीं जाएगा, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या पार्टी से संबंध रखता हो।

दिल्ली हाई कोर्ट के जज एस मुरलीधर के तबादले पर जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सरकार केवल फैसले लेती है और सिफारिश सुप्रीम कोर्ट का कॉलेजियम करता है। न्‍यायाधीश के तबादले के संबंध में सिफारिश 12 फरवरी को ही आ गई थी। केवल आदेश बाद में जारी किया गया। यह एक रूटीन ट्रांसफर था। इस मामले का तबादले का कोई भी लेना देना नहीं है। इस संबंध में जज की भी सहमति रिकॉर्ड में दर्ज है। मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि यह क्या तरीका है कि केवल एक ही जज न्याय करने में सक्षम है। बाकी जज क्‍या न्याय नहीं करते हैं। देश में इतने सारे न्‍यायाधीश हैं लेकिन क्या कुछ ही जज न्‍याय करते हैं… यह कैसी मानसिकता है।

गृहमंत्री शाह ने कहा कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि सीएए से किसी की नागरिकता नहीं जाएगी… यह नागरिकता लेने वाला नहीं बल्कि नागरिकता को देने का कानून है। एनपीआर में भी सूचना देने या नहीं देने का विकल्प मौजूद है। NPR में किसी भी नागरिक से कोई भी दस्‍तावेज नहीं मांगा जाएगा। आपके पास जो व्यक्तिगत जानकारी हैं उसे ही देने की जरुरत नहीं है। देश के किसी भी नागरिक को NPR से डरने की जरूरत नहीं है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमने उपराज्यपाल के लिए जरिए दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्‍य न्‍यायाधीश से भी निवेदन किया है कि आप ही कोई क्लेम कमिश्‍नर नियुक्त कर दें जिससे दंगों में शामिल उपद्रवियों की संपत्ति राजसात की जा सके। शाह ने विपक्ष को जवाब देते हुए कहा कि मैं देश का गृह मंत्री हूं मुझ पर जितने सवाल उठाने हैं उठाइये लेकिन दिल्ली पुलिस पर सवाल मत उठाइए। दिल्‍ली पुलिस ने पूरी मुस्‍तैदी के साथ अपना काम किया है। दिल्‍ली पुलिस ने इस हिंसा को 13 फीसद आबादी से बाहर नहीं फैलने दिया। पुलिस पर इस तरह के सवाल उठाने से उसका मनोबल गिरता है।

Facebook Comments