सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकार का बड़ा तोहफा

राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय

भोपाल। चुनावों से पहले सरकार सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को एक बड़ा तोहफा देने जा रही है। इसके तहत जहां सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के जीवन की कुछ सुविधाओं में इजाफा होगा। वहीं जानकारों का मानना है कि सरकार सरकारी खजाने पर भी इसका काफी असर पड़ेगा।

दरअसल सामने आ रही सूचनाओं के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों को मोदी सरकार जल्द ही बड़ा तोहफा देने की तैयारी कर रही है। सरकार कर्मचारियों और पेंशनर्स का महंगाई भत्ता बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाली सैलरी और रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन पर पड़ेगा।

खबर ये भी है कि लेबर मिनिस्ट्री इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की नई सीरीज पर काम कर रही है। इसके आधार पर महंगाई भत्ते को तय किया जाएगा।

सरकार की तरफ से अगर महंगाई भत्ता बढ़ाया जाता है तो इसका फायदा एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मिलेगा।

सरकार की ओर से उठने वाले इस कदम की सूचना सामने आते ही कर्मचारियों व पेंशनर्स में काफी उत्साह का माहौल है। वहीं मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल सहित प्रदेश में कार्यरत केंद्रीय कर्मचारी व इस सेवा से रिटायर्ड हो चुके लोगों ने इसे सरकार का एक अच्छा कदम बताया है।

हम लोगों को एक निश्चित पेंशन मिलती है, ऐसे में महंगाई भी हर दिन बढ़ने से हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। केंद्र सरकार यदि डीए में कुछ अच्छे बदलाव करती है तो ये स्वागत योग्य है।
– वीडी गुप्ता, रिटायर्ड केंद्र सरकार कर्मचारी

लगातार महंगाई बढ़ रही है, लेकिन उस रफ्तार से आय नहीं बढ़ती जिससे सभी को परेशानी होती है। सरकार का ये कदम महंगाई भत्ते को बढ़ाने से हमें कुछ सहुलियत ही मिलेगी।
– यू रमेश, केंद्र सरकार कर्मचारी

सरकार द्वारा डीए में बढ़ौतरी करना हमें काफी हद तक सुकुन देगा। क्योंकि पेंशन इतनी नहीं होती कि आप अपने खर्चोें के अलावा अच्छे से मेडिकल चैकअप करा सके। बुजुर्ग अवस्था में बीमारी आम बात है, ऐसे में महंगाई भी हो जाने से सारी पेंशन इसी में खर्च हो जाती है।
– एमएम सिंह, रिटायर्ड केंद्र सरकारी कर्मचारी

ऐसे होती है डीए की गणना…
डीए की गणना कर्मचारी की बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में की जाती है। महंगाई के असर को कम करने के लिए कर्मचारियों को महंगाई भत्ता दिया जाता है। दरअसल डीए एक तरह का कॉस्ट ऑफ लिविंग एडजस्टमेंट अलाउंस है, जो देश में सरकारी कर्मचारियों, पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिया जाता है।

एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तहत काम करने वाले लेबर ब्यूरो ने इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की नई सीरीज 2016 को बेस ईयर मानते हुए फाइनल कर दिया है। जबकि मौजूदा इंडेक्स का बेस ईयर 2001 है।

हर छह साल पर होगा बदलाव…
जो सूचना समने आ ही है, उसके अनुसार अब बेस ईयर में प्रत्येक छह साल पर बदलाव किया जाएगा। कहा जा रहा है कि बदलाव का उद्देश्य जीवनयापन के खर्च में आने वाले बदलावों के असर को कम करना है। वहीं इससे पहले बेस ईयर में बदलाव साल 2006 में किया गया था, यह बदलाव छठे केंद्रीय पे-कमीशन की तरफ से किया गया था। उस दौरान बेस ईयर को 1982 से बदलकर 2001 कर दिया गया था।

खजाने पर ये पड़ेगा असर…
बेस ईयर में बदलाव करने से सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का असर पड़ने की उम्मीद है। दरअसल नए इंडस्ट्रियल सेंटर्स को भी नए इंडेक्स में शामिल किया जाएगा, जिससे ऐसे सेंटरों की संख्या 78 से बढ़कर 88 हो जाएगी।

पिछले 15 साल में औद्योगिक कर्मचारियों की जीवनशैली में आने वाले बदलावों का असर शामिल करने के लिए लिस्ट में कार और मोबाइल समेत कई चीजे जोड़ी जा रही हैं।

वहीं इससे पहले सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मार्च 2018 में डीए 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया था। यह बढ़ोतरी जनवरी 2018 से प्रभावी हुई थी। इससे भी केंद्र सरकार के 48.41 लाख कर्मचारियों और 61.17 पेंशनभोगियों को फायदा हुआ था। जबकि यह भी सूचना आ रही है कि अंतिम रूप देने से पहले इस नए इंडेक्स को टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी के पास आकलन के लिए भेजा जाएगा। यहां से इसे नेशनल ट्राईपार्टी कंसल्टेशन के लिए भेजा जाएगा।