मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रामीणों की सतर्कता से बची नन्हे तेंदुए शावक की जान

Sandeep Tiwari
14 July 2021 6:07 PM GMT
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में ग्रामीणों की सतर्कता से बची नन्हे तेंदुए शावक की जान
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Chhindwara News / छिंदवाड़ा न्यूज़ : एक तेंदुए के शावक की जांन ग्रामीणों की सतर्कता से बच गई। शावक जब ग्रामीणों को मिला उस समय वह आवारा कुत्ते और अन्य जानवरों से घिरा हुआ था। ग्रामीणों ने शावक को बचाने की ठानी और बडी चतुराई से कुत्तों और जानवरों को हटाकर शावक को अपने साथ ले गये। ग्रामीणों ने शावक को सुरक्षित हर्रई रेंज (Harrai forest range) ऑफिस में ले जाकर सौंप दिया। वहीं वन विभाग की टीम ने शावक को उसी मां के पास पहुंचा दिया। 

Chhindwara News / छिंदवाड़ा न्यूज़ : एक तेंदुए के शावक की जांन ग्रामीणों की सतर्कता से बच गई। शावक जब ग्रामीणों को मिला उस समय वह आवारा कुत्ते और अन्य जानवरों से घिरा हुआ था। ग्रामीणों ने शावक को बचाने की ठानी और बडी चतुराई से कुत्तों और जानवरों को हटाकर शावक को अपने साथ ले गये। ग्रामीणों ने शावक को सुरक्षित हर्रई रेंज (Harrai forest range) ऑफिस में ले जाकर सौंप दिया। वहीं वन विभाग की टीम ने शावक को उसी मां के पास पहुंचा दिया।

धाधरा गांव में मिला था शावक

मिली जानकारी के अनुसार हर्रई वन परिक्षेत्र (Harrai forest range) के धाधरा गांव (Dhadhara village) के रहने वाले जसवंत सिंह आदिवासी को तेंदुए का शावक दिखा। वह पहले तो नही समझ पाये लेकिन जब कुछ नजदीक जाकर देखा तो वह समझ गये कि यह नन्हा शावक अपनी मां से बिछड गया है। वह शावक के बचाने की ठान ली।

ग्रामीणों को बुलाया

जसवंत सिंह आदिवासी ने शवका को बचाने के लिए गांव के लोगों के आवज दी। जिस जगह पर शावक दिखा वहीं शावक के आसपास आवारा कुत्ते घेरा बनाये बैठे थे। साथ ही अन्य जानवर और घातक पक्षी भी घात लगाए बैठे थे। ऐसे में जसवंत ने ग्रामीणों की मदद से पहले सभी आवारा जानवरो और कुत्तों के भगाया और शावक को एक झोले में रखकर निकल गया।

शावक का हुआ प्राथमिक उपचार

गंव के लोग जैसे ही शावक को लेकर हर्रई वन परिक्षेत्र (Harrai forest range office) आफिस पहुचे वहां मौजूद टीम ने शावक का प्राथमिक उपचार किया। बाद में शावक को उसकी मां से मिलवाने के लिए धाधरा बीट में लेजाकर एक खुले पिंजरे में डाल दिया गया। वही वन कर्मचारी पहरे पर भी रहे। बताया जाता है कि रात के 11 बजे तेंदुआ उसकी आवाज सुनकर वहां पहुंच गई और उस शावक को अपने साथ ले गई।

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