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8100 करोड़ की लागत से बन रही रीवा-सिंगरौली रेल लाइन निर्माण में कई अडचनें, अब तक 16 में से मात्र 1 ही टनल बन पाई

रीवा सिंगरौली सीधी

रीवा/सिंगरौली। रीवा-सीधी-सिंगरौली रेलवे लाइन में आ रही अड़चनों को अभी भी दूर नहीं किया जा सका है। रेलवे एवं प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जमीन अधिग्रहण को लेकर खींचातानी मची हुई है। यही वजह है कि 164 किमी. की इस रेल लाइन के लिए जमीन अधिग्रहण का काम अभी पूरा नहीं हो पाया है।

वहीं रेलवे भी काम में तेजी नहीं ला रहा है। करीब 8100 करोड़ की लागत से बन रही इस लाइन में 16 सुरंग बनानी है। लेकिन हालत यह है कि अभी एक भी सुरंग का काम पूरा नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि 3.3 किमी. के एक टनल पर काम शुरू हो गया है।

सोन नदी पर एक पुल का भी निर्माण होना है। उसका भी अभी काम नहीं शुरू हुआ है। चार रेलवे स्टेशन बनाने का काम अभी शुरू हो रहा है। कार्य में धीमी गति पर रेलवे एवं प्रशासनिक अधिकारी एक दूसरे की कमियां गिनाकर अपना बचाव कर रहे हैं। इस प्रकार इस रेलवे लाइन का काम अत्यंत धीमी गति से चल रहा है।

सांसद रीति पाठक ने भले ही रीवा से सिंगरौली रेल लाइन लोगों के लिए जल्द उपलब्ध कराने का वादा किया हो लेकिन जिस तरह से काम चल रहा है उससे लोगों की उम्मीद धूमिल पड़ गई है। पिछले चार वर्षों के दौरान काम में तेजी नहीं आने से लोग निराश हैं।



भूमि अधिग्रहण में अधिकारियों की लेटलतीफी
इस रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण में अधिकारी लापरवाही कर रहे हैं। अभी तक धारा 19 के प्रकाशन की प्रक्रिया चालू नहीं हुई है। भूमि अधिग्रहण कर रेलवे को सौंपे जाने की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। हालांकि राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी सफाई दे रहे हैं कि धारा 19 के तहत सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्यवाही जल्द पूरी कर ली जाएगी।

जमीन में रोड़ा
प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही की वजह से रेलवे को जमीन मिलने में देरी हो रही है। राजस्व अभिलेख दुरुस्त नहीं होने की वजह से कठिनाई आ रही है। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक उन्हें जमीन क्लियर कर नहीं उपलब्ध कराई जा रही है।

कलेक्टर अनुराग चौधरी ने यह कहकर और मुश्किल बढ़ा दी है कि जल्द जमीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी। उनका तर्क है कि प्रभावित लोगों से मिले आवेदनों पर सुनवाई चल रही है। उसमें समय लगेगा। हालांकि उन्होंने 14 जुलाई तक रेलवे को भूमि सौंपने को कहा है।

वन विभाग भी खड़ी कर दी मुश्किल
रेलवे लाइन निर्माण के रास्ते में 140 हेक्टेयर वन विभाग की जमीन आ रही है। इस भूमि के लिए वन विभाग से अनुमति आवश्यक है। लेकिन वन विभाग के अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं।

सांसद रीति पाठक एवं कलेक्टर अनुराग चौधरी के निर्देश के बाद भी वन विभाग के अधिकारी रेलवे की सुन नहीं रहे हैं। वन विभाग की जमीन में लगे पेड़ों की गणना कर जमीन रेलवे को सौंपनी है।

सिंगरौली – सीधी रीवा रेलवे लाइन के बीच करीब 08 किमी के छह स्ट्रेच आते हैं। जिसमें वन विभाग की जमीन होने की वजह से काम रोका गया है। वन विभाग की जमीन गैर वन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करने की अनुमति वनमण्डलाधिकारी से आवश्यक है।

  • रीवा सिंगरौली लाइन – 164 कि.मी.
  • लागत – 8100 करोड़
  • टनल (सुरंग) – 16
  • रेलवे स्टेशन – 4
  • सोन नदी पर पुल – 1