आजादी का जश्न मना है, मौत अभी तुम रूक जाना, अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना : डॉ. सुहासिनी साठे

रीवा

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में 16 अगस्त को शायं 5 बजे अंतिम सांसे ली।

आजादी का जश्न मना है, मौत अभी तुम रूक जाना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना

माना तू अटल, सुनिश्चित, मैं भी एक अटल हूं ना?
थोड़ी कर ले आज प्रतीक्षा, हूं द्वार खड़ा तुम आ जाना
आजादी की वर्षगांठ है, देश को जश्न मनाने दो
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

जल, थल, नभ में आजादी का उत्सव है, आनंद दिखे
भारत मां का श्रृंगार कर, बेड़ी उतरे मृदु चरण दिखे
मैं मन की आंखों से देखूं, तुम मुझे देखते रूक जाना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

झुका रहे क्यूं ध्वज भारत का? सब मौन रहें मैं ना चाहूं
मेरे देश का जन-मन रोए, ऑख अश्रु मैं ना चाहूं
बस कल तक यह काल रूके, फिर साथ चलूं तुम कल आना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

स्वाधीन दिवस की सालगिरह, स्वात्यंत्र किरण का उजियारा
है जन-गन-मन का अमृत स्वर, वो मातृगीत जग से न्यारा
कर लूं देश वेदना जी भर, हो तृप्त कर्ण फिर तुम आना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

नहीं पराजित हूं मैं तुमसे, तू तो मेरी सहचर है
अटल, एक बस तू ही ना है, एक अटल धरती पर है
इसीलिए टल जाना, कल पर सांझ पूर्व ही आ जाना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

तीन रंग में निद्रा अंतिम, भारत जननी की गोद मिले,
तिलक भाल हो इस माटी का, वंदन चंदन स्वर मोद मिले
अंतिम सांसों तक राष्ट्र प्रेम की, ज्योति जनाने आ जाना
अभी तिरंगा लहराया है, आज नहीं तुम कल आना…

रचनाकार
डॉ. सुहासिनी साठे,
डीन संगीत, एपीएस विवि, रीवा
विभाग प्रमुख, संगीत, शा.कन्या महाविद्यालय, रीवा