रीवा : नहीं झेल सके निलंबन का सदमा, ऐसे हुई मौत

रीवा

6-7 माह से नहीं मिला था वेतन, 28 जुलाई को किया गया था निलंबित,

रीवा।। प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुमेदा, संकुल केंद्र मार्तंड -3 रीवा मे पदस्थ शालिकराम दुबे को डाइट प्राचार्य रीवा के निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर सीईओ जिला पंचायत रीवा ने 28/7/18 को निलंबित कर दिया था! जानकारी मिली है कि मृतक भृत्य शालिकराम दुवे का विगत 6-7 माह से वेतन भुगतान नहीं किया गया था। वेतन के लिये वह वरिष्ठ कार्यालय आते-जाते थे उसके पास किराए तक के लिए पैसे नहीं था, भूखों मरने की स्थिति आ गई थी । ऊपर से जिला पंचायत द्वारा निलंबन का झेल नहीं सके। 2/8/18 की सायं को अचानक शरीर में दर्द उठा आनन-फानन में रीवा के संजय गांधी इसमें चिकित्सालय ले जाया गया जहां रात में उनकी मृत्यु हो गई । 3 तारीख को सुबह उनकी मृत्यु हो गई। जैसे ही शालिकराम के मौत की खबर विभाग को पहुंची तो सनाका खींच गया। तो वही निलंबित करने से और प्रतिवेदन देने वाले अधिकारी के हाथ पाँव फूलने लगे। पूर्व में वेतन क्यों रोका गया था इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है l लेकिन सुमेदा स्कूल में डाइट प्राचार्य की निरीक्षण टीम ने जांच की । प्रतिवेदन के आधार पर सीईओ ने निलंबित कर दिया। जबकि जिला पंचायत सीईओ को चाहिए था कि स्पष्टीकरण ले…लेकिन ऐसा नहीं किया गया और सीधे निलंबित कर दिया गयाl मृतक शालिकराम द्विवेदी के पुत्र कामेश्वर प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि बिगत कई दिनों से परेशान थे क्योंकि उन्हेंं 6-7 माह से वेतन नहीं मिला था और वह ऑफिसों का चक्कर काट रहे थे इसी दौरान उन्हें निलंबन होने की जानकारी मिली तब सेेेे वे और ज्यादा परेशान हो गए 2 तारीख की रात उन्हें दर्द उठा हॉस्पिटल ले गए जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई l

*शिक्षा विभाग के शिक्षक, लिपिक, भृत्य, कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत, जिला शिक्षा कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में अटैचमेंट है लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। ये लोग मलाईदार पदों में बैठे हुए हैं इनको ऐसे कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है जिनका कार्य रेगुलर तौर पर पदस्थ उसी विभाग के कर्मचारियों को देना चाहिए लेकिन सांठगांठ कर कर इन्हें मलाईदार पद दिए हुए हैं*

*शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कार्यनामों की बात करें तो एक सहायक अध्यापक को वेतन से भी ज्यादा भुगतान कर दिया गया है जिसकी वसूली करने में अधिकारीयो को पसीना आ रहा है । यहां तक कि संबंधित सहायक अध्यापक के संकुल प्राचार्य ने भी लिखकर दे दिया है कि जो अधिकतर अशोक तान की गई है उसमें हमारे हस्ताक्षर नहीं हैं l लेकिन अभी तक कार्यवाही नहीं की जा रही है l तो वहीं एक भृत्य को 6-7 महीने तक वेतन के लिए परेशान होना पड़ा । क्योंकि उसके पास विभाग को देने के लिए कुछ नहीं था । इसीलिये वह एक-एक रूपये के लिए मोहताज हो कर हो गया और अंत में उसकी मृत्यु हो गई l*