रीवा: वेंटिलेटर पर आयुर्वेद अस्पताल, इलाज के लिए इंतज़ार करते मरीज

रीवा

चिकित्सकों द्वारा मरीजों को भर्ती न करने का खुला खेल

रीवा। आयुर्वेद अस्पताल एवं महाविद्यालय की हालत इस समय बाद से बदतर है । जहाँ कुछ चिकित्सक मरीजों को भर्ती करने के बजाय उन्हें संजय गाँधी अस्पताल ले जाने के लिए कह देते हैं । जबकि आयुर्वेद अस्पताल में 24 घंटे मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है। इसके बावजूद चिकित्सक मरीजों को देखते नहीं।

इस तरह का मामला गुरुवार को दोपहर 12 बजे देखने को मिला। आयुर्वेद अस्पताल के बाहर लकवा पीड़ित बुद्धसेन साकेत को सुबह 9 बजे से परिजन जमीन में लिटाये चिकित्सकों से मिन्नत कर रहे थे की इन्हे भर्ती कर लीजिये। लेकिन ओ पी डी में बैठे चिकित्सक सुनने को तैयार नहीं थे। जब दूसरी पाली में डॉ राजीव अग्निहोत्री से परिजनों ने कहा तो उन्होंने फौरन मरीज को भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया ।

जबकि इस तरह का मामला कोई पहला नहीं है आयुर्वेद अस्पताल के ज्यादातर अपनी ओ पी डी के समय में गंभीर मरीजों को भर्ती ही नहीं करते जिस कारण अस्पताल में आईपीडी मरीजों की संख्या काफी काम है। अस्पताल में अगर किसी मरीज को अपनी ओपीडी समय पर जो चिकित्सक भर्ती करता है उसे मरीज को देखने वार्ड में 2 बार आना पड़ता है जिस कारण चिकित्सकों द्वारा बहार खोली गई ओपीडी पर प्रभाव पड़ता है। यही वजह है चिकित्सक अपनी ओपीडी समय में भर्ती मरीजों को कम से कम भर्ती करते हैं।

नेशनल इन्स्टिट्यूट ऑफ़ आयुर्वेद जयपुर से MD करने के बाद 2016 मे पी एस सी द्वारा चयनित डॉ राजीव अग्निहोत्री की पदस्थापना शा आयुर्वेद महाविद्यालय एवं चिकित्सालय रीवा मे होने से रीवा मे आयुर्वेद के दिन वापस आ गये है। उन्होने 2 वर्ष मे रीवा मे प्रख्यात आयुर्वेद डा कुशवाहा को भी लोकप्रियता मे काफी पीछे छोड दिया है। डा. अग्निहोत्री द्वारा गम्भीर रोगो का सफल इलाज किया जा रहा है।

अस्पताल में दीन दयाल के बजट का अभाव अक्सर बना रहता है जिस कारण मरीजो को समय पर दवा नहीं मिल पाती है। जिस कारण मरीज कम ज्यादा होते रहते हैं।
डॉ दीपक कुलश्रेष्ट, प्राचार्य आयुर्वेद अस्पताल

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