फिर निर्मम हत्या से काँपा रीवा, युवक के शव को …

रीवा

रीवा । युवक की निर्दयतापूर्वक हत्या कर आरोपियों ने पत्थरों के नीचे दबा दिया। रविवार की सुबह युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। युवक की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर घटना की जांच शुरू कर दी है। घटना सोहागी थाने के लाद पहाड़ की है।

लाद पहाड़ में सडक़ के किनारे युवक का शव पड़ा हुआ था। वहां से गुजर रहे स्थानीय लोगों ने भीषण दुर्गंध आने पर पास जाकर देखा तो पत्थरों के नीचे युवक का शव दबा हुआ था जिसके शरीर के कुछ भागों को कुत्तों ने नोंच खाया था। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी जिस पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। सीन ऑफ क्राइम यूनिट के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आरपी शुक्ला ने भी टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया।

शव दफन नहीं हुआ तो उसे पत्थरों से छिपा दिया

युवक का आधा शरीर जमीन के अंदर दबा हुआ था और आधा शरीर बड़े-बड़े पत्थरों के नीचे दबा था। काफी प्रयास के बाद पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। शव किसी 30 से 35 वर्षीय युवक का था। शव पूरी तरह से सड़ चुका था। आशंका जताई जा रही है कि युवक की हत्या तीन से चार दिन पूर्व हुई है। आरोपियों ने पहले उसकी हत्या की और शव को छिपाने के लिए पहले गड्ढा खोदा गया लेकिन जब उसमें शव दफन नहीं हुआ तो उसे पत्थरों से छिपा दिया गया। पुलिस ने आसपास का पूरा इलाका छान डाला लेकिन आरोपियों से जुड़े कोई साक्ष्य पुलिस को नहीं मिले हे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भिजवा दिया है।

नहीं हुई शव की पहचान

शव की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने आसपास के लोगों से उसकी पहचान करवाने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली है। उसका फोटो दूसरे थानों को भी भेजा जा रहा है। उक्त युवक को कहीं बाहर से लाया गया था और हत्या करके शव को फेंक दिया गया। युवक की पहचान के बाद ही जांच आगे बढ़ पायेगी।

शवों का डपिंग प्वाइंट बना सोहागी पहाड़
सोहागी पहाड़ शवों का डपिंग प्वाइंट बन गया है। पिछले चार-पांच सालों के अंतराल में इसके इलाके में दो दर्जन से अधिक शव मिल चुके है जिनकी हत्या करके यहां फेंंका गया था। गत वर्ष एक महिला व उसकी पांच वर्षीय बच्ची की हत्या करके शव को फेंंका गया था।

अभी तक जितने भी शव यहां मिले है उनमें एक को छोडकऱ किसी भी पहचान हो पाई है। यूपी के बदमाश बेखौफ होकर यहां हत्या करते है और शवों को फेंंककर फरार हो जाते है। पुलिस इन मामलों को सुलझाने में दिलचस्पी नहीं दिखाती है बल्कि तीन माह बाद खात्मा लगाकर अपनी जिम्मेदारियों से इतिश्री कर लेती है।