रीवा: अगर आप फुलकी खाने के हैं शौक़ीन तो हो जाएं सावधान! बैटरी के एसिड से बन रहा है जलजीरा

Rewa
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रीवा। अगर आप फुलकी खा रहें है तो सावधान हो जाइए, योंकि ठेलों में बिकने वाली फुलकी आपके सेहद को खराब कर सकती है। प्रदेश सरकार ने मिलावट खोरी पर शिकंजा कसने के लिए अभियान चला रखा है। शुद्ध पर युद्ध का अभियान चल रहा है लेकिन यह अभियान केवल खानापूर्ति तक ही सीमित होकर रह गया रीवा में भी जांच शुरू की गई लेकिन अभी तक दूध एवं उससे बनी सामग्री पर ही फोकस किया जाता रहा है जबकि खाने पीने से जुड़ी ऐसी कई सामग्रियां खुले मार्केट में बेची जा रही हैं। रीवा शहर में केवल दूध और उससे बनी सामग्री ही मिलावट के प्रभाव में नहीं है बल्कि अन्य कई खानपान से जुड़ी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका सेवन लोग कर रहे हैं, सेहत के लिए यह खतरा बताई गई है।

10 लीटर पानी में तीन से चार चमच एसिड
का उपयोग शहर में फुलकी की और चाट खाने वाले वालों की संया सर्वाधिक है इस कारोबार से जुड़े अधिकांश ऐसे लोग हैं जो फुलकी का जल जीरा बनाने में बैटरी से निकले एसिड का उपयोग करते हैं। यह जीभ में पहुंचते ही तीखे पन का एहसास कराता है 3 से 4 लीटर जल जीरा सामान्य रूप में ही बनाया जाता है और उसमें जरूरी चीजें डाली जाती है। इसके बाद बैटरी एसिड तीन से चार चमच की मात्रा में मिलाया जाता है और पानी की मात्रा बढ़ाकर इसे करीब 10 लीटर तक बना दिया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर शिल्पी प्लाजा के पास फुलकी का ठेला लगाने वाले युवक ने बताया कि एसिड मिलाने का प्रचलन बाहर से आए दुकानदारों ने शुरू किया है जिसका उपयोग स्थानीय ठेले वाले भी करने लगे हैं। शहर के सर्राफा मार्केट में सहजता से मिल जाता है ठेलों में टमाटर का सॉस भी मिलावट का शिकार है इसमें भी केमिकल डाला जाता है।

दुकानदारों की हो रही फजीहत
मिलावट खोरी का शिकार केवल आम उपभोक्ता ही नहीं हो रहे हैं बल्कि इससे दुकानदारों की भी फजीहत हो रही है दुकानदारों का कहना है कि कई बार मिलावट से परेशान राहत सामग्री लेकर वापस करने पहुंच जाता है ग्राहक को नाराज नहीं कर सकते इसलिए दूसरी सामग्री देनी पड़ती हैं।

मसाले में मिलावट, सबसे अधिक नमकीन में खारा सोडा
बता दें कि शहर की किराना दुकानों में सादे पैकेट में मिलने वाले नमकीन में खारा सोडा मिलाया जाता है नमकीन को कड़क और अलग स्वाद बनाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

हल्दी में किनकी
जानकारों की मानें तो सबसे अधिक हल्दी में मिलावट हो रही है पहले इसमें बेसन मिलाया जाता था फिर आरारोट का उपयोग शुरू हुआ अब किनकी को पीसकर मिलाया जाता है साथ ही पीला रंग डाल दिया जाता है जिससे पहचान पाना मुश्किल हो जाता है 10 से 12 रूपए प्रति किलो बिकने वाली किनकी की हल्दी 150 रूपए में बेची जा रही है।

मिर्ची पाउडर में गेरू और तेजाब
मिर्ची पाउडर में गेरू को मिलाया जाता है मार्केट में नहीं बिकने वाली सड़ी गली मिर्ची को पीसकर उसमें लाल रंग के गेरू को मिलाया जाता है तीखापन महसूस कराने के लिए चांदी साफ करने वाले तेजाब को मिला दिया जाता है इस मिर्ची को खाने पर मुंह जलने लगता है लोग समझते हैं तीखापन है।

बेसन में किनकी की मिलावट
बताया गया है कि खाने की कई वस्तुओं में इन दिनों किन की का उपयोग किया जा रहा है, चने की कीमत अधिक होने की वजह से किन की पीसकर इसमें मिलाई जाती है और पीलापन दिखाने के लिए रंग डाला जाता है। वहीं काली मिर्च में पपीते का दाना, पोस्ता दाना में सूजी, रसगुल्ला पावडर में सूजी का उपयोग खोवा में आलू और मैदा मिलाया जा रहा है।

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