रीवा: ज्योति स्कूल में फिर मचा हड़कंप, प्राचार्य और प्रबंधक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज

रीवा: जिला प्रशासन से बढ़कर है ज्योति स्कूल प्रबंधन, जांच करने गई टीम को बेरंग लौटाया

रीवा

रीवा। कलेक्टर के निर्देश पर डीईओ का तीन सदस्यीय दल सीनियर सेकंडरी ज्योति स्कूल जांच करने पहुंचा। लेकिन स्कूल के प्राचार्य ने दल की किसी तरह मदद करने से इंकार कर बैरंग लौटा दिया। उन्होंने कहा कि हम कोई भी जानकारी आपको नहीं उपलध करा सकते, आप जा सकते हैं। इतना सुनते ही जांच दल दबे पांव वापस लौट गया।

ज्ञात हो कि अब तक ज्योति स्कूल को प्राथमिक व मिडिल कक्षाओं की मान्यता नहीं मिल पाई है। मान्यता की फाइल डीईओ कार्यालय में अटकी है। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन के ऐसे तेवर से खुद जांच दल हैरान रह गया। जांच दल अब कलेटर को रिपोर्ट भेजने की तैयारी में हैं।

बताया गया कि इससे पहले जांच दल गीतांजलि व बाल भारती स्कूल भी गया था, जहां के प्राचार्य व स्टाफ ने दल को पूरा सहयोग दिया। जांच दल में डीईओ प्रतिनिधि डॉ. पीएल मिश्र, सिलपरा प्राचार्य केपी त्रिपाठी व एपीसी अमरनाथ सिंह शामिल रहे। इन बिंदुओं पर करनी थी जांच डीईओ पैनल को 3 वर्षों में अनुपातिक फीस वृद्धि, गणवेश का परिवर्तन कब-कब हुआ, कितनी दुकानों में उपलध है व पुस्तकें एनसीआरटी की लग रही हैं या प्राइवेट प्रकाशक की, इन तीन बिन्दुओं पर जांच कर कलेटर को रिपोर्ट देनी थी। लेकिन सहयोग न करने से विद्यालय प्रवंधन एक बार फिर से कटघरे में खड़ा हो गया। देखना यह है कि अब जिला प्रशासन स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए या कदम उठाता है।

दरअसल ज्योति स्कूल प्रशासन के तेवर इस वजह से बढ़े होते हैं क्योंकि वह शहर का सबसे हाई प्रोफाइल विद्यालयों में से एक है. शहर के आला अधिकारी से लेकर नेता तक के बच्चों की शिक्षा दीक्षा इसी स्कूल में होती है. लिहाजा स्कूल प्रबंधन खुद को शासन-प्रशासन से बढ़कर मानता है. वहीँ हक़ीक़त भी यही है की जब ज्योति स्कूल की बात आती है तो जिला प्रशासन मायूस सा नज़र आने लगता है. हांलाकि कलेक्टर श्रीमती प्रीति मैथिल नायक ने यह साफ़ किया था की स्कूलों की मनमानी अब बिलकुल भी नहीं चल पाएगी, अब देखना यह है की कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी स्कूल प्रबंधन की इस मनमानी पर क्या कार्रवाई करते हैं.