इनामी डकैत महेंद्र धोनी का खेल ख़त्म, उप्र पुलिस ने किया एनकाउंटर, एमपी पुलिस को रह गया मलाल

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रीवा। जिले की पुलिस की नींद उड़ाने वाले तराई क्षेत्र में अपनी दहशत फैलाकर आतंक पर्याय रहा महेन्द्र पासी उर्फ धोनी को पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान उसे मौत की नींद सुला दिया है। इलाहाबाद पुलिस अधिकारियों ने जिले के पुलिस कप्तान से संपर्क करके धोनी के एनकाउंटर की जानकारी देने के साथ ही रीवा और एमपी पुलिस द्वारा धोनी के खिलाफ घोषित की गई इनामी राशि तथा उसके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर जानकारी भी मांगी है।

मूलतः देसाह थाना रयपुरा जिला चित्रकूट उत्तर प्रदेश का रहने वाला डकैत महेन्द्र पासी उर्फ धोनी पिता लखपति पासी (20) ने सीमा पार रीवा जिले के डभौरा और पनवार थाना क्षेत्र में अपहरण और फिरौती की मांग करते हुए कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया था और उसके खिलाफ 364 का तथा एडी एक्ट के दो मामले डभौरा और दो मामले पनवार थाना में दर्ज हैं। लगभग 7 माह पूर्व जिले की पुलिस के लिए धोनी किसी सिरदर्द से कम नहीं था और लगातार अपराधिक घटनाओं को अपने गिरोह के साथ मिलकर अंजाम देने के साथ ही पुलिस के लिए वह चुनौती बना हुआ था। यही वजह रही कि पुलिस महेन्द्र धोनी के खिलाफ 50 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर रखी थी।

रजौआ की हत्या कर बना था सरदार

जिले में बढ़ी अपराधिक घटनाओं के बीच पुलिस अधिकारियों ने तराई में डेरा डालते हुए धोनी गिरोह के कई सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता पाई थी और पकड़े गए सदस्यों ने जो खुलासा किया था उसके तहत महेन्द्र पासी उर्फ धोनी गुप्पा गिरोह का सदस्य था। गुप्पा से रजौआ ने अपना अलग गिरोह बना लिया और महेन्द्र उसके गिरोह में शामिल हो गया। बाद में अपने साथियों के साथ मिलकर रजौआ की महेन्द्र पासी ने उत्तर प्रदेश में हत्या कर दी थी और स्वयं धोनी गिरोह का वह सरदार बना था।

इस तरह के दर्ज हैं मामले

महज 20 साल की उम्र में महेन्द्र पासी न सिर्फ दस्यु गिरोह का सरगना बना बल्कि उसके अपराधिक रिकार्ड पर नजर दौड़ाई जाए तो रीवा जिले के डभौरा और पनवार थाना क्षेत्र में अगस्त और सितम्बर माह में एक-एक करके चार वारदातों को अंजाम दिया था। जिसके तहत डभौरा थाना क्षेत्र से डिप्टी रेंजर का अपहरण करके धोनी गिरोह ने फिरौती की मांग किया था। तो वहीं इस घटना के बाद ज्ञानेन्द्र कहार नामक व्यक्ति का अपहरण करके फिरौती मांगी थी। धोनी की वारदातें यही तक नहीं थमी और उसने एक बार फिर राम सिंह बहेलिया और उसके बाद तारेश पटेल और उसके भाई का खेत से अपहरण करके फिरौती की मांग करके पुलिस को चुनौती दे दिया था।

पकड़े गए गिरोह के सदस्य

डभौरा, पनवार थाना क्षेत्र में अपहरण की घटना के मप्र के पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने रीवा रेंज के अधिकारियों की बैठक लेकर डकैतों को पकड़ने के लिए सख्त निर्देश दिए थे और उनकी बैठक के बाद रीवा रेंज के आईजी उमेश जोगा के निर्देश पर तत्कालीन एसपी रहे ललित कुमार शाक्यवार ने स्वयं तराई में डेरा डालकर महेन्द्र सिंह धोनी गिरोह का राइट हैंड रहा अमरजीत और गिरोह का सदस्य समय कुमार, रामकुमार सहित 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जबकि सरगना महेन्द्र सिंह धोनी पुलिस के हाथ नहीं लगा था।

धोनी के हाथ न लगने पर जिले के पुलिस को है मलाल

कंपकंपाती ठंड के बीच महेन्द्र सिंह धोनी की जंगल में तलाश करने वाली रीवा जिले की पुलिस को मलाल है कि उनके हाथ ईनामी डकैत धोनी नहीं लगा है। जबकि उसकी तलाश करने डभौरा, पनवार, जवा, अतरैला, सेमरिया सहित आसपास के थानों का पुलिस बल के साथ ही लगभग 200 पुलिस जवान और पुलिस अधिकारी जगल में सर्चिंग किए थे। साथ ही एसएएफ के जवान भी जिले के तराई के जंगल में उतारे गए थे। बावजूद इसके सरगना रहा महेन्द्र सिंह धोनी रीवा पुलिस के हाथ नहीं लगा है और जैसे ही जानकारी हुई कि यूपी की इलाहाबाद पुलिस ने धोनी का मुठभेड़ के दौरान सफाया कर दिया है जानकारी मिलने के बाद जिले के पुलिस को मलाल है कि धोनी उसके हाथ नहीं लगा।

इलाहाबाद पुलिस ने सूचना दी है कि महेन्द्र पासी उर्फ धोनी की मुठभेड़ के दौरान मौत हो गई है। उसे अपराधिक रिकार्ड और घोषित ईनाम की जानकारी इलाहाबाद पुलिस ने चाही है। धोनी की जानकारी यूपी पुलिस को दी जा रही है।-सुशांत सक्सेना, एसपी, रीवा।