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रीवा : सफाई के लिए 2 माह बिना छुट्टी लिए की थी दिन-रात मेहनत, जानिए फिर क्यों रह गए पीछे…

रीवा

सर्विस लेवल में कम अंक मिले अन्यथा बेहतर रैंक मिलती, रैंकिंग जारी होने के बाद से फिर बिगडऩी लगी शहर की व्यवस्थाएं

रीवा। शहरों की स्वच्छता रैंकिंग कुछ दिन पहले ही जारी की गई है। देश के 4041 शहरों में रीवा को 49वां स्थान मिला, जिसे बेहतर नहीं कहा जा सकता तो खराब प्रदर्शन में भी जोडऩा उचित नहीं है। कई ऐसे शहरों से रीवा आगे है जिन्हें स्मार्ट सिटी का दर्जा सरकार ने दे रखा है। इस रैंकिंग के लिए हुए सर्वे के अलग-अलग अंक भी जारी किए गए हैं, जिसमें केन्द्र सरकार की टीम ने जो देखा वह इंदौर और भोपाल के समान ही रहा है। पब्लिक ओपीनियन में इंदौर और भोपाल से रीवा आगे रहा है तो वहीं डायरेक्ट आब्जर्वेशन में भी उनके करीब ही अंक मिले हैं।

डायरेक्ट आब्जर्वेशन के 1200 अंक निर्धारित थे जिसमें रीवा को 1161 अंक मिले। इससे एक बहस यह भी शुरू हो गई है कि जिस तरह सर्वे के दिनों में शहर को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखा गया, उसी तरह मेहनत हर समय हो तो देश के प्रमुख स्वच्छ शहरों में रीवा को भी शामिल किया जा सकता है।

रैंकिंग जारी होने के बाद निगम के कर्मचारियों की उदासी साफ नजर आ रही है। सर्वे के दिनों में करीब दो महीने तक बिना अवकाश लिए सबने पूरी ताकत झोंक दी थी। इसमें केवल स्वच्छता से जुड़े कर्मचारियों की मेहनत शामिल नहीं है बल्कि निगम के सभी विभागों के कर्मचारियों का परिश्रम शामिल है। स्वच्छता रैंकिंग में शहर पिछड़ा तो केवल संसाधनों की कमी की वजह से।

सर्विस लेवल प्रोग्रेस में हुआ पीछे
सर्विस लेवल प्रोग्रेस में 1400 अंकों में रीवा को महज 501 मिले, जिसकी वजह से स्वच्छता रैंकिंग में काफी पीछे खिसक गया। इससे साबित हुआ है कि केवल सफाई के भरोसे लाज बच गई अन्यथा और भी नीचे की रैंक मिलती।

टॉप शहरों का ये रहा डायरेक्ट आब्जर्वेशन
स्वच्छता सर्वे को तीन भागों में बांटा गया था, जिसमें डायरेक्ट आब्जर्वेशन के 1200 अंक निर्धारित थे। जिसमें केन्द्र की टीम ने जो देखा उसी के आधार पर नंबर दिए गए हैं। टॉप-5 शहरों के साथ रीवा का ये रहा है प्रदर्शन-

  • इंदौर- 1189
  • भोपाल- 1179
  • चंडीगढ़- 1139
  • नई दिल्ली- 1158
  • विजयवाड़ा- 1195
  • रीवा – 1161

सिटीजन फीडबैक में इंदौर-भोपाल से रहा आगे
स्वच्छता को लेकर इंदौर के लोगों की प्रधानमंत्री ने चाहे भले सराहना की हो लेकिन अपने शहर को स्वच्छ बताने में रीवा के लोग पीछे नहीं रहे हैं। टॉप शहरों से जो सिटीजन फीडबैक मिला है, उसमें रीवा ने औरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। सिटीजन फीडबैक के 1400 अंकों में रीवा को 1231 अंक मिले, जबकि टॉप में रहे शहर इंदौर को 1159, भोपाल को 1205, नईदिल्ली को 1085 अंक ही मिल पाए। स्वच्छता की समस्याओं को लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों ने शिकायतें जरूर की है लेकिन सर्वे के दौरान बताया है कि रीवा सफाई में बेहतर काम कर रहा है।

कचरा कलेक्शन और उठाव में उदासीनता
शहर में डोरटूडोर कचरा कलेक्शन करने और प्रमुख स्थानों से इसके उठाव की जवाबदेही निगम ने रामकी कंपनी को सौंप रखी है। इस कंपनी के पास पर्याप्त संसाधन नहीं होने की वजह से इस समय शहर के हर हिस्से से शिकायतें आ रही हैं। वार्डों के पार्षदों के पास मोहल्लों के लोग सुबह से ही कचरा उठाव नहीं होने की शिकायतें करने लगते हैं और तस्वीरें भी भेजते हैं।

निगम के अधिकारियों से पार्षदों की कहासुनी भी इसी मामले को लेकर आए दिन हो रही है। अधिकारियों ने भी कंपनी को कई बार चेतावनी दी लेकिन उसकी ओर से अब तक कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकी है।

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