रीवा: चिरहुला मंदिर में एक माह तक चलने वाला मेला शुरू, आप भी करें चिरहुलानाथ के दर्शन

रीवा

रीवा. विंध्य क्षेत्र की खुशहाली और अच्छी बारिश की कामना के साथ शहर के चिरहुलानाथ मंदिर में शुक्रवार से एक माह के लिए मेला शुरू हो गया है। जहां भक्तों द्वारा एक माह तक विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्तों की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन द्वारा सुविधाएं भी बनाई गई हैं। बैरीकेड्स लगाकर चिरहुलानाथ के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को नियंत्रित किया जाएगा। मंदिर से भक्तों का विशेष लगाव और आस्था होने के साथ ही अषाढ़ मास में मेले की वर्षों पुरानी परंपरा है।

इस दौरान मंदिर में पहुंचकर भक्तों द्वारा पूजा-अर्चना के साथ ही भगवान सत्य नारायण की कथा, मानस पाठ, सुंदरकांड पाठ व भण्डारे का भी आयोजन भी किया जा ता है। संकट मोचन हनुमान को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर, फूल और कपड़े आदि चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जा रही है। सर्वाधिक भीड़ मंगलवार और शनिवार को पहुंचती है। जिसके चलते इस दिन पुलिस बल तैनात रहने के साथ ही मंदिर प्रशासन द्वारा भी व्यवस्थाएं बनाई जाती हैं। गुरू पूर्णिमा पर हजारों भक्त मंदिर में पहुंचकर अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए पूजा-अर्चना करेंगे।

chirahula-Mandirजिला न्यायालय की उपाधि

मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों की मानें तो चिरहुलानाथ भगवान को जिला न्यायालय की उपाधि भी भक्तों द्वारा दी गई है। लोगों का मानना है कि चिरहुलानाथ के दरबार में अर्जी लगाने पर उनकी समस्या का निराकरण हो जाता है। जिसके चलते भक्तों द्वारा इन्हें कोर्ट के रूप में भी पूजा जाता है। बारिश शुरू होने के पूर्व और कृषि कार्य को देखते हुए आषाढ़ मास में भक्तों द्वारा विशेष पूजा की यह वर्षो पुरानी परंपरा आज भी कायम है।

व्यापारियों ने सजाईं दुकानें

आषाढ़ मास में भक्तों की बढ़ती भीड़ और मेले को देखते हुए व्यापारियों ने भी दुकानें सजा ली हैं। फूल-प्रसाद व्यापारियों ने जहां पर्याप्त प्रसाद का स्टाक किया है वहीं खिलौना और घरेलू उपयोग की सामग्री के व्यापारियों ने भी अपनी दुकानें लगा ली हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि इस वर्ष भी उन्हें एक माह तक व्यापार करने का अच्छा मौका मिलेगा। खाने-पीने और मनोरंजन की भी सुविधा उपलब्ध है।

अषाढ़ मास में मेले की वर्षों पुरानी परंपरा है। खुशहाली के लिए लोग एक महीने तक चिरहुलानाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। -डूडू महाराज, प्रबंधक, चिरहुलानाथ मंदिर, रीवा।