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रीवा: विश्वविद्यालय की जमीन पर रातोंरात हो गया अवैध उत्खनन, विवि प्रशासन के कानों में जू तक न रेंगी

रीवा

रीवा। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की जमीन का दोहन कर कई बार सैकड़ों ट्राली मुरुम का अवैध खनन किया गया है। ताज्जुब की बात तो यह है कि इस अवैध खनन में विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों की मिलीभगत है। बुधवार रात विश्वविद्यालय के हॉस्टल के पीछे स्थित तालाब में रातोंरात जबरदस्त खोदाई की गई। जिसके बाद 10 डम्फर से अधिक मुरुम निकाल ली गई।

इस मामले में विवि अधिकारियों का कहना है कि विवि की जमीन में अतिक्रमण किये हुए लोगों का रास्ता बाधित करने के लिए खोदाई की गई। ऐसे में प्रश्न उठता है कि रास्ता बंद करने के लिए विवि ने बाउण्ड्रीबाल क्यों नहीं बनवाई। जबकि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि रात में ठेकेदार ने दो हाइवा और एक जेसीबी के साथ मुरुम की खोदाई कर विवि परिसर के बाहर ले गया।

ऐसे में साफ जाहिर होता है कि विश्वविद्यालय में हो रहा अवैध उत्खनन विवि अधिकारियों की सह में हो रहा है। अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय की जमीन और खनिज संपदा का गलत इस्तेमाल पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई बार विश्वविद्यालय के तालाब के आसपास की जमीन खोदकर सैकड़ों ट्राली मुरुम निकाली जा चुकी है। गौरतलब है कि मुरुम खनिज की श्रेणी में आता है। जिसका खनन और इस्तेमाल करने के लिए खनिज विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है।

मगर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सारे नियम कानून से किनारा करते हुए अपनी ही भूमि का गलत इस्तेमाल किया है। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की देर रात विवि अधिकारियों के सामने जेसीबी का इस्तेमाल करके ठेकेदार द्वारा तालाब के किनारे की जमीन का बड़े पैमाने पर खनन किया गया। ऐसे में विश्वविद्यालय के इंजीनियर का कहना है कि विवि की जमीन में अतिक्रमण किए हुए लोगों का रास्ता बंद करने के लिए तीन दिन पहले खोदाई की गई थी। जबकि क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि गत रात्रि विवि के ठेकेदार मुकेश पाण्डेय द्वारा तालाब की मुरुम का खनन किया गया है।

विवि अधिकारियों के ऐसे उत्तर देने से प्रश्न उठता है कि जब विश्वविद्यालय अपने ही इस्तेमाल के लिए विवि की मुरुम का खनन कर रहा है तो देर रात चोरी छिपे खोदाई क्यों कराई गई। वास्तविकता में भूमि में की गई खोदाई की गहराई देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि करीब 10 से 15 ट्राली से अधिक मुरुम का अवैध खनन किया गया है।

एक महीने पहले भी हुई थी खुदाई
विश्वविद्यालय में एक महीने पहले भी रातों रात तालाब के समीप खोदाई कर सैकड़ों ट्राली मुरुम का खेल किया गया था। उस दौरान विवि इंजीनियर का कहना था कि कुलपति आवास में गड्ढा पाटने के लिए खनन किया गया था। पुलिस की कार्रवाई और विवि के आला अधिकारियों के कोई कदम न उठाने से विवि की जमीन का दोहन लगातार हो रहा है। ऐसे में ठेकेदार और उससे जुड़े विवि अधिकारी विवि की खनिज सम्पदा का दोहन कर लाखों में खेल रहे हैं।

तीन दिन पहले खोदाई की गई थी मगर अवैध कॉलोनी का रास्ता बंद करने के लिए। सिर्फ जेसीबी का इस्तेमाल किया गया था। –यादवेन्द्र सिंह चौहान, विश्वविद्यालय यंत्री