रीवा : अतिथि विद्वानों को सरकार की बड़ी सौगात, जरूर पढ़िये ये खबर

रीवा

रीवा। सालों से प्रति लेक्चर 275 रुपए मानदेय पाने वाले अतिथि विद्वानों को उच्च शिक्षा विभाग ने सौगात दी है। साथ ही 11 माह में आमंत्रण देने की नीति को बदलकर 12 महीने कर दिया गया है। गौरतलब है कि महाविद्यालयों में लगभग एक दशक से सैकड़ों अतिथि विद्वान कम मानदेय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और शासन से वे नियमित करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि विद्वानों की आर्थिक समस्या को दूर करने का फरमान जारी कर दिया है।

राज्य शासन द्वारा पत्र जारी करते हुए कहा गया है कि प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरुद्ध प्रति कालखण्ड मानदेय के आधार पर प्रति वर्ष अतिथि विद्वानों को 11 माह हेतु आमंत्रण देने की नीति अंतर्गत वर्तमान में प्रचलित व्यवस्था में परिवर्तन करने के लिए सम्पूर्ण शैक्षणिक वर्ष की कालावधि के लिए प्रति काल खण्ड के स्थान पर दैनिक मानदेय का निर्धारण करने हेतु न्यूतनतम निश्चित मानदेय के आधार पर आमंत्रण दिया जाए। गौरतलब है कि अब तक वर्तमान व्यवस्था अंतर्गत अतिथि विद्वानों को अधिकतम एक बार में 11 माह के लिए ही आमंत्रित करने की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। जिसमें पहले से कार्यरत अतिथि विद्वानों को पुनः आवेदन करना पड़ता है। उच्च शिक्षा विभाग ने 11 माह के स्थान पर सम्पूर्ण वर्ष की अवधि के लिए आमंत्रण दिए जाने का निर्णय लिया है।

नियमित पदस्थापना होने पर हो जाएगी छुट्टी
जहां एक तरफ उच्च शिक्षा विभाग ने अतिथि विद्वानों की आर्थिक समस्या को दूर किया है, वहीं उनकी नौकरी को लेकर कड़ा निर्णय लिया है। उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार नियमित पदपूर्ति होने तक वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वान निरंतर आमंत्रण पर रहेंगे। जिसमें एक बार आमंत्रित अतिथि विद्वान को उसके कार्य के मूल्यांकन के आधार पर अधिकतम तीन वर्ष के लिए आमंत्रित किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा महाविद्यालय में स्थानांतरण के फलस्वरूप नियमित नियुक्ति किए जाने की स्थिति में उक्त अतिथि विद्वान का आमंत्रण स्वतः समाप्त हो जाएगा तथा उसे उच्च शिक्षा विभाग के किसी अन्य महाविद्यालय में रिक्त पद के विरुद्ध प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार आमंत्रण हेतु पुनः आवेदन करना होगा।

शैक्षणिक कार्य 20 दिन से कम हुआ तो भी मिलेंगे 30 हजार
अब तक अतिथि विद्वानों को प्रचलित मानदेय प्रति लेक्चर 275 रुपए की दर से अधिकतम तीन लेक्चर के आधार पर दिए जाते रहे हैं। नए निर्देशों के तहत शासकीय महाविद्यालयों में संचालित नियमित पाठ्यक्रम अंतर्गत प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ा अधिकारी एवं ग्रंथपाल के स्वीकृत पदों के विरुद्ध रिक्त पदों पर पूरे वर्ष के लिए आमंत्रित करते हुए अतिथि विद्वानों को प्रतिदिन 15सौ रुपए दिया जाएगा वहीं मासिक मानदेय न्यूनतम 30 हजार रुपए के भुगतान की पात्रता होगी। यही नहीं यदि किसी माह में शैक्षणिक कार्य 20 दिन से भी कम होता है तो उस माह में भी अतिथि विद्वान की उपस्थिति के आधार पर उसे 30 हजार रुपए मानदेय दिया जाएगा। मगर महाविद्यालय में पदस्थ अतिथि विद्वानों को सात घण्टे की ड्यूटी निभानी होगी तथा सभी कार्य संतोषप्रद रूप से निष्पादित करने होंगे।

शासन के निर्णय से अतिथि विद्वानों की आर्थिक समस्या का निराकरण होगा। मगर महाविद्यालय में रेगुलर पदस्थापना होने के बाद उक्त अतिथि विद्वान को दूसरे महाविद्यालय में फिर से आवेदन करना होगा।
विनोद कुमार श्रीवास्तव, अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा विभाग

सौजन्य -स्टार समाचार