MPCA ने रीवा में 1.39 करोड़ की जमीन 7.35 में खरीदी, ग्वालियर स्टेडियम के लिए प्रोफेशनल्स को दिए 3.6 करोड़

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इंदौर. मप्र क्रिकेट एसोसिएशन की वित्तीय वर्ष 2018-19 की बैलेंसशीट बन गई है। यह 15 सितंबर को मैनेजिंग कमेटी की बैठक में पास होने के लिए रखी जाएगी। इस बैलेंसशीट में संस्था के कुछ खर्चों पर ऑडिटर ने आपत्ति ली है। इसमें सबसे अहम रीवा में जमीन खरीदी और ग्वालियर में बन रहे क्रिकेट स्टेडियम के संबंध में है।

बीसीसीआई से अनुदान नहीं मिल रहा, तोड़नी पड़ी 33 करोड़ की एफडी
बीसीसीआई की प्रशासनिक समिति ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नया संविधान लागू नहीं करने वाली संस्थाओं का वित्तीय अनुदान रोक दिया है। इसी कारण एमपीसीए को ढाई साल से अनुदान नहीं मिल रहा है। संस्था वित्तीय घाटे में जा रही है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में घाटा 20 करोड़ रुपए था, जो 2018-19 में बढ़कर 29.58 करोड़ रुपए हो गया। इसलिए संस्था को अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तोड़नी पड़ रही है।

2018 में एफडी 95 करोड़ रुपए की थी, जो अब 63 करोड़ रुपए की रह गई है। एफडी घटने से संस्था को इससे मिलने वाले ब्याज में भी सालाना ढाई करोड़ की कमी आ गई है। साथ ही 2018-19 के दौरान संस्था को आठ करोड़ का लोन भी लेना पड़ा। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए भी संस्था ने करीब दो करोड़ रुपए के घाटे की आशंका जताई है। बीसीसीआई रुका हुआ अनुदान (एक साल का करीब 35 करोड़) दे देता है तो संस्था की हालत सुधर जाएगी।

ऑडिटर की आपत्ति
रीवा में स्टेडियम : गाइडलाइन मूल्य से ज्यादा में खरीदी जमीन
रीवा के भाटी गांव में संस्था ने क्रिकेट मैदान के लिए 7.35 करोड़ रुपए में 4.02 हेक्टेयर जमीन खरीदी है, जबकि रीवा कलेक्टोरेट के हिसाब से इसकी गाइडलाइन कीमत केवल 1.39 करोड़ रुपए है।

ग्वालियर में स्टेडियम : ज्यादा पेमेंट किया प्रोफेशनल्स को
ग्वालियर में बन रहे क्रिकेट स्टेडियम में 18 करोड़ 82 लाख रुपए का काम हुआ है, जबकि आर्किटेक्ट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट आदि प्रोफेशनल को 3.60 करोड़ की फीस दे दी। प्रोफेशनल्स को इतनी जल्दी किया गया यह पेमेंट कुल खर्च के हिसाब से काफी ज्यादा है।

एमपीसीए का तर्क : विज्ञापन देकर निविदा बुलाकर किया था जमीन का सौदा
जमीन की भौगोलिक स्थिति क्रिकेट मैदान के लिए उपयुक्त है। इस जमीन के लिए विज्ञापन देकर निविदा बुलाकर सौदा किया। इसलिए इसकी इतनी कीमत दी। इसमें किसी भी तरह की ब्रोकरेज या अन्य भुगतान नहीं हुआ है।

करार के हिसाब से ही चरणबद्ध तरीके से पेमेंट किया था
हालांकि मैनेजमेंट ने ऑडिटर की इस आपत्ति पर तर्क दिया है कि स्टेडियम में करार के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से प्रोफेशनल्स को पेमेंट किया जा रहा है। स्टेडियम के काम में देरी संस्था के पास राशि की कमी के कारण आई थी। ऐसे में प्रोफेशनल्स की फीस आदि नहीं रोकी जा सकती। पेमेंट में गलत कुछ भी नहीं है।

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